गोरखपुर,: उत्तर प्रदेश के मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने सोमवार को घोषणा की कि प्रदेश के सभी शैक्षणिक संस्थानों में अब ‘वंदे मातरम’ गाना अनिवार्य होगा। यह निर्णय राष्ट्रीय गीत को लेकर चल रहे राजनीतिक विवाद के बीच आया है, जिसमें पीएम मोदी ने पिछले हफ्ते दावा किया था कि 1937 में वंदे मातरम के कुछ महत्वपूर्ण छंद हटा दिए गए थे।
गोरखपुर में आयोजित ‘एकता यात्रा’ कार्यक्रम को संबोधित करते हुए मुख्यमंत्री ने कहा कि यह कदम नागरिकों में भारत माता और मातृभूमि के प्रति श्रद्धा और गौरव की भावना पैदा करेगा। उन्होंने कहा कि कुछ लोगों के लिए आज भी भारत की एकता और अखंडता से बढ़कर उनका मत और मजहब महत्वपूर्ण हो जाता है, लेकिन वंदे मातरम के विरोध का कोई औचित्य नहीं है।
योगी आदित्यनाथ ने कांग्रेस पर निशाना साधते हुए कहा कि 1896-97 में गुरुदेव रविंद्रनाथ टैगोर ने कांग्रेस अधिवेशन में वंदे मातरम प्रस्तुत किया था। 1923 में मोहम्मद अली जौहर ने कांग्रेस अध्यक्ष रहते हुए इसके गायन का विरोध किया, जो भारत के विभाजन के पीछे एक दुर्भाग्यपूर्ण घटना बन गई। मुख्यमंत्री ने दावा किया कि अगर कांग्रेस ने उस समय वंदे मातरम के माध्यम से राष्ट्रीयता का सम्मान किया होता, तो भारत का विभाजन नहीं होता।
उन्होंने आगे कहा कि कांग्रेस ने 1937 में वंदे मातरम में कुछ संशोधन करने के लिए एक कमेटी बनाई थी। रिपोर्ट में कहा गया कि कुछ शब्दों में भारत माता को दुर्गा, लक्ष्मी और सरस्वती के रूप में प्रस्तुत किया गया था, जिन्हें संशोधित किया गया।
कांग्रेस ने प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी से माफी की मांग की है, जिन्होंने आरोप लगाया था कि 1937 में वंदे मातरम के कुछ छंद हटाए गए थे, जिससे विभाजन के बीज बोए गए। कांग्रेस का कहना है कि पीएम ने 1937 की कांग्रेस कार्यसमिति और रवींद्रनाथ टैगोर का अपमान किया। पार्टी प्रवक्ता जयराम रमेश ने रविवार को बताया कि 26 अक्टूबर से 1 नवंबर 1937 तक कोलकाता में हुई कार्यसमिति में महात्मा गांधी, जवाहरलाल नेहरू, सरदार पटेल, सुभाष चंद्र बोस और अन्य शामिल थे, और इस बैठक में वंदे मातरम पर एक बयान जारी किया गया था, जो टैगोर की सलाह से तैयार किया गया था।

