धरती पुत्र, जननायक, किसानों-मज़दूरों की आवाज़ और सामाजिक न्याय के संघर्षशील प्रहरी—मुलायम सिंह यादव भारतीय राजनीति का वह नाम हैं जिन्होंने अपनी सरलता, धरातली नेतृत्व और जनमानस से अटूट जुड़ाव के बल पर एक युग की रचना की। उनकी जयंती के अवसर पर उन्हें भावपूर्ण नमन करते हुए यह लेख समर्पित है।
मुलायम सिंह यादव: एक साधारण घर से असाधारण शिखर तक
22 नवंबर को जन्मे मुलायम सिंह यादव का जीवन संघर्ष, परिश्रम और जनसेवा का प्रतीक था। बेहद साधारण कृषक परिवार से निकलकर वे न केवल उत्तर प्रदेश के तीन बार के मुख्यमंत्री बने, बल्कि देश के रक्षा मंत्री के रूप में भी उत्कृष्ट नेतृत्व दिया। उनकी राजनीतिक यात्रा इस बात का प्रमाण है कि सच्ची निष्ठा और निरंतर संघर्ष किसी भी व्यक्ति को शिखर तक पहुँचा सकते हैं।
धरती पुत्र क्यों कहे गए?
क्योंकि मुलायम सिंह यादव अपनी मिट्टी, अपने खेतों, अपने लोगों से कभी दूर नहीं हुए।
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किसानों की कर्ज़ माफी
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गरीब और पिछड़े वर्गों के लिए संघर्ष
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सामाजिक न्याय के लिए वंचितों का हाथ थामना
इन सबने उन्हें जनता का ‘धरती पुत्र’ बनाया। वे राजनैतिक चातुर्य के साथ-साथ मानवीय संवेदनाओं के भी प्रतीक थे।
सादगी और संघर्ष का प्रतीक
उनके जीवन की सबसे बड़ी ताकत थी उनकी सादगी। चाहे मुख्यमंत्री का पद हो या रक्षा मंत्री की कुर्सी, मुलायम सिंह यादव हमेशा गांव के चौपाल वाले मुलायम ही रहे—वही विनम्रता, वही अपनापन और वही बिना दिखावे वाली राजनीति।
जनता के मन में आज भी जिंदा हैं मुलायम
आज उनका व्यक्तित्व राजनीति की उस शैली का प्रतिनिधित्व करता है जिसका केंद्र सिर्फ ‘जनता’ थी। वे उस पीढ़ी के नेता थे जिनका हर निर्णय जनहित से प्रेरित होता था। उनके प्रयासों से युवा, किसान, मजदूर और समाज के कमजोर तबके को नई दिशा मिली।
जयंती पर श्रद्धांजलि
धरती पुत्र मुलायम सिंह यादव की जयंती हमें समर्पण, सादगी और संघर्ष की उस राह की याद दिलाती है जिस पर चलकर उन्होंने करोड़ों दिलों में सम्मान प्राप्त किया।
आज जब हम उनकी स्मृतियों को नमन करते हैं, तब यह भी स्वीकार करते हैं कि उनके विचार और उनका संघर्ष भविष्य की राजनीति को भी प्रेरित करता रहेगा।
धरती पुत्र को शत-शत नमन।
— अज़हर उमरी

