आगरा। बालूगंज खोआ गली स्थित दरगाह पर जश्न-ए-साबिर-ए-पाक व 22वीं शरीफ के मौके पर फातिहा ख्वानी, बज्म-ए-मुर्शिदी और दुआ का रूहानी कार्यक्रम बड़े अदब व एहतराम के साथ आयोजित किया गया। शनिवार, 11 अप्रैल को नमाज़-ए-असर के बाद शुरू हुई इस महफ़िल में शहर और आसपास से आए अकीदतमंदों ने बड़ी तादाद में शिरकत कर बुजुर्गाने दीन को खिराज-ए-अकीदत पेश किया और सवाब-ए-दारेन हासिल किया।
महफ़िल में खास तौर पर हज़रत ख़्वाजा शैकुलमशैक पीर अलहाज़ तस्सद्रुक हुसैन उर्फ़ रमज़ान अली शाह चिश्ती साबरी रहमतुल्लाह अलैह की याद में महाना फातिहा का एहतमाम किया गया। साथ ही औलिया-ए-किराम के इसाले सवाब के लिए कुरआन ख्वानी और दुआएं की गईं। उलेमा-ए-किराम व सूफिया-ए-इकराम ने अपने खिताब में कहा कि सूफी संतों की तालीमात इंसानियत, मोहब्बत, सहिष्णुता और भाईचारे का पैगाम देती हैं, जो आज के दौर में बेहद अहम है।
इस रूहानी महफ़िल में शहर की जानी-मानी सूफी, अदबी और सामाजिक हस्तियों की गरिमामयी मौजूदगी रही। इनमें प्रमुख रूप से सूफी मोहम्मद अली अंसारी मियां लियाकती, सूफी मोहम्मद दिलकश जालनोवी, अब्दुल सईद रवान आगई, कासिम हुसैन कादरी बरकाती, हाफिज कारी अब्दुल वाहिद विलगत्मी, सैय्यद हाजी गुलजार, शहीदउल्ला माहिर, सूफी बुन्दन मियां, खलीफा अब्दुल जब्बार, सैय्यद खावर हाशमी, अज़हर उमरी, हनीफ भाई, सोहेब चिश्ती साबरी, सूफी रानीउदीन चिश्ती साबरी गुलामी, सैय्यद तारीक मियां, रफीक खान, शहीद अब्बासी, हाशिम चिश्ती साबरी, इंतजार अहमद, नासिर अहमद, जहीर अहमद, मौलाना करयूम, राम दयाल, सागर, मुहम्मद रफीक,डॉ. जमील अंसारी और जफर कुरैशी समेत कई गणमान्य लोग शामिल रहे।
महफ़िल के दौरान नात-ओ-मनकबत पेश की गईं, कुरआन ख्वानी हुई और फातिहा ख्वानी के बाद सामूहिक दुआ में मुल्क की तरक्की, अमन-ओ-चैन, भाईचारे और खुशहाली के लिए खास दुआएं मांगी गईं। इस मौके पर मौजूद लोगों ने औलिया-ए-किराम की तालीमात पर अमल करने का संकल्प भी लिया।
कार्यक्रम का आयोजन पीरजादा अलहाज कासिम अली शाह चिश्ती साबरी रमज़ानवी की सरपरस्ती में किया गया। उन्होंने सभी अकीदतमंदों और मेहमानों का शुक्रिया अदा करते हुए कहा कि ऐसे रूहानी जलसे समाज में मोहब्बत, एकता और इंसानियत के जज़्बे को मजबूत करते हैं।
महफ़िल के समापन पर लंगर का आयोजन किया गया, जिसमें बड़ी संख्या में लोगों ने शिरकत कर बरकत हासिल की।

