आगरा: बहुचर्चित भागचंद पहलवान हत्याकांड में सुप्रीम कोर्ट ने महत्वपूर्ण फैसला सुनाते हुए 19 दोषियों को आजीवन कारावास (उम्रकैद) की सजा बरकरार रखी है। इस ऐतिहासिक निर्णय में आगरा के प्रख्यात अधिवक्ता अजय वीर सिंह जैन की सक्रिय पैरवी ने न्याय दिलाने में अहम भूमिका निभाई।
यह मामला 11 जुलाई 2003 को मध्य प्रदेश में घटित हुआ था, जब विख्यात पहलवान भागचंद, जिन्हें “मध्य प्रदेश केसरी” की उपाधि से सम्मानित किया गया था, की निर्मम हत्या कर दी गई थी। घटना उस समय हुई जब वे नर्मदा नदी में स्नान कर वापस लौट रहे थे।
इस मामले में ट्रायल कोर्ट ने 24 आरोपियों में से 19 को दोषी मानते हुए उम्रकैद की सजा सुनाई थी। हालांकि बाद में मध्य प्रदेश हाई कोर्ट ने इस फैसले को आंशिक रूप से बदलते हुए सजा को धारा 304 (भाग-2) में परिवर्तित कर दिया था। इसके बाद पीड़ित पक्ष ने इस आदेश को चुनौती देते हुए सुप्रीम कोर्ट में अपील दायर की।
सुप्रीम कोर्ट में यह मामला न्यायमूर्ति संजय करोल और न्यायमूर्ति संदीप मेहता की पीठ के समक्ष सुना गया। विस्तृत सुनवाई के बाद अदालत ने ट्रायल कोर्ट के फैसले को पुनः बहाल करते हुए सभी 19 आरोपियों को हत्या का दोषी ठहराया और आजीवन कारावास की सजा सुनाई। साथ ही दोषियों को 8 सप्ताह के भीतर आत्मसमर्पण करने के निर्देश भी दिए गए हैं।
पीड़ित पक्ष के अधिवक्ता अजय वीर सिंह जैन ने कहा कि यह मामला न केवल दोषियों को सजा दिलाने का था, बल्कि समाज का न्याय व्यवस्था पर विश्वास बनाए रखने का भी था। उन्होंने बताया कि यह 20 वर्ष से अधिक पुराना और जटिल मामला था, लेकिन अंततः न्याय की जीत हुई।
गौरतलब है कि इस पूरे प्रकरण में भारतीय दंड संहिता की विभिन्न धाराओं सहित अनुसूचित जाति एवं जनजाति (अत्याचार निवारण) अधिनियम के तहत मुकदमा दर्ज किया गया था।
आगरा निवासी अजय वीर सिंह जैन ने अपनी प्रारंभिक शिक्षा सेंट पीटर्स कॉलेज और सेंट जॉन्स कॉलेज से प्राप्त की है।
यह फैसला न केवल पीड़ित परिवार के लिए न्याय की बड़ी जीत माना जा रहा है, बल्कि समाज में न्यायपालिका के प्रति विश्वास को और मजबूत करने वाला भी साबित हुआ है।

