नई दिल्ली। सुप्रीम कोर्ट ने मंगलवार को उत्तर प्रदेश के विधायक अब्बास अंसारी को उत्तर प्रदेश गैंगस्टर्स एंड एंटी-सोशल एक्टिविटीज (प्रिवेंशन) एक्ट के तहत दर्ज मामले में नियमित जमानत दे दी। भारत के मुख्य न्यायाधीश (सीजेआई) सूर्यकांत की अध्यक्षता वाली पीठ ने अंसारी को पिछले वर्ष मार्च में दी गई अंतरिम जमानत को स्थायी कर दिया।
अदालत ने इससे पहले सितंबर 2025 में अंसारी की स्वतंत्रता पर लगाई गई कुछ शर्तों में भी ढील दी थी। इनमें यह अनुमति भी शामिल थी कि वे लखनऊ स्थित अपने पुराने पते के अलावा किसी अन्य स्थान पर रह सकते हैं, बशर्ते नए पते की जानकारी उत्तर प्रदेश पुलिस और संबंधित निचली अदालत को दी जाए।
सुप्रीम कोर्ट ने यह भी स्पष्ट किया था कि अंसारी के सार्वजनिक रूप से बोलने पर कोई सामान्य प्रतिबंध नहीं है। अदालत ने कहा था कि एक सार्वजनिक व्यक्ति और निर्वाचित प्रतिनिधि होने के नाते अंसारी सामाजिक और आर्थिक मुद्दों पर बोल सकते हैं, जैसा कि आम तौर पर राजनेता करते हैं। हालांकि, उन्हें अपने खिलाफ लंबित मामलों पर सार्वजनिक टिप्पणी करने से रोका गया था, क्योंकि वे न्यायिक विचाराधीन हैं।
गौरतलब है कि अगस्त 2024 में अब्बास अंसारी के खिलाफ मारपीट और जबरन वसूली के आरोपों में गैंगस्टर एक्ट के तहत मामला दर्ज किया गया था। इसके बाद दिसंबर 2024 में इलाहाबाद हाईकोर्ट ने उनकी जमानत याचिका खारिज कर दी थी। अंसारी को 4 नवंबर 2022 को अन्य आपराधिक मामलों में हिरासत में लिया गया था, जबकि 6 सितंबर 2024 को उन्हें गैंगस्टर एक्ट के मामले में गिरफ्तार किया गया।
सुप्रीम कोर्ट ने मार्च 2025 में अंतरिम जमानत देते हुए यह भी उल्लेख किया था कि गैंगस्टर एक्ट के मामले को छोड़कर अन्य सभी मामलों में अंसारी को पहले ही जमानत मिल चुकी है। इस प्रकरण में नवनीत सचान, नियाज़ अंसारी, फ़राज़ खान और शाहबाज़ आलम खान भी सह-आरोपी हैं।

