आगरा में टोरेंट पावर को काम करते 20 वर्ष पूरे हो चुके हैं। इतने लंबे समय में शहर की बिजली व्यवस्था कागज़ों में भले बेहतर दिखाई दे, लेकिन उपभोक्ताओं के अनुभव बिलकुल इसके उलट हैं।
लोगों का कहना है कि कंपनी बिजली देने से ज्यादा, उपभोक्ताओं से मनमाने शुल्क वसूलने में सक्रिय है। नया कनेक्शन लेने वालों से ‘टोरेंट पावर इलेक्ट्रिक विज़न’ का हवाला देकर लाखों रुपये तक वसूले जाने के आरोप लगातार सामने आते रहे हैं।
मनमानी वसूली और बढ़ती परेशानी
शहरवासियों का कहना है कि वर्षों बीत जाने के बाद भी आगरा बिजली समस्याओं से मुक्त नहीं हो पाया। ऊपर से, कनेक्शन जोड़ने–काटने, वर्ड चार्ज से लेकर हर सेवा में कंपनी द्वारा मनमाने शुल्क लेने की शिकायतें आम बात हैं।
लोगों का आरोप है कि टोरेंट पावर ने “लूट” मचा रखी है और उपभोक्ता अपनी ही जेब से लगातार भारी कीमत चुकाने को मजबूर हैं।
सरकारी नीति और कंपनी की मनमानी
लोकसभा और विधानसभा चुनावों के दौरान भारतीय जनता पार्टी ने नारा दिया था —
“टोरेंट पावर भागो, आगरा बचाओ।”
भाजपा सरकार की मंशा निजी बिजली कंपनियों की मनमानी रोकने और उपभोक्ता हितों को सुरक्षित करने की बताई गई थी। लेकिन जनता का आरोप है कि डबल इंजन की सरकार होने के बावजूद टोरेंट पावर के खिलाफ कोई सख्त कदम नहीं उठाया गया।
सरकार के आदेश के अनुसार 50 किलोवाट तक का कनेक्शन LT लाइन पर दिया जाना चाहिए, लेकिन इसके बावजूद टोरेंट पावर इलेक्ट्रिशियन और तकनीकी कारणों का हवाला देकर आगरा के नागरिकों से भारी-भरकम रकम वसूल करती है।
शिकायतों का समाधान शून्य के बराबर
गलत बिलिंग, बार-बार ट्रांसफॉर्मर की दिक्कतें, अनियमित सप्लाई, और शिकायतों का समय पर समाधान न होना—ये समस्याएँ बीते दो दशकों से आज भी जस की तस बनी हुई हैं।
जनता का आरोप है कि कंपनी की इन मनमानी के पीछे कुछ प्रभावशाली लोगों की मिलीभगत भी शामिल है, जिसकी वजह से टोरेंट पावर पर कोई कार्रवाई नहीं होती।
जनता न्याय चाहती है
आगरा के उपभोक्ता अब जवाबदेही, पारदर्शिता और राहत चाहते हैं। उनका सवाल स्पष्ट है—
जब सरकार खुद स्वीकार करती है कि उपभोक्ता हित सर्वोपरि हैं, तो फिर टोरेंट पावर पर नियंत्रण कब?

