लखनऊ। उत्तर प्रदेश में लगभग चार वर्षों के लंबे इंतजार के बाद अब पूर्णकालिक पुलिस महानिदेशक (डीजीपी) की नियुक्ति का रास्ता साफ होता नजर आ रहा है। योगी आदित्यनाथ सरकार ने इस दिशा में तेजी दिखाते हुए केंद्र सरकार को वरिष्ठ आईपीएस अधिकारियों का पैनल भेज दिया है।
📌 कार्यवाहक डीजीपी का लंबा दौर
वर्ष 2017 में योगी सरकार बनने के बाद सुलखान सिंह को डीजीपी नियुक्त किया गया था। उनके बाद ओपी सिंह, एचसी अवस्थी और मुकुल गोयल ने 11 मई 2022 तक यह पद संभाला।
इसके बाद से राज्य में लगातार कार्यवाहक डीजीपी का दौर जारी है। देवेंद्र सिंह चौहान, आरके विश्वकर्मा, विजय कुमार, प्रशांत कुमार और वर्तमान में राजीव कृष्ण इस जिम्मेदारी को संभालते रहे हैं।
⚖️ सुप्रीम कोर्ट के नियम के तहत प्रक्रिया
संघ लोक सेवा आयोग के दिशा-निर्देशों के अनुसार, राज्यों को डीजीपी नियुक्ति के लिए वरिष्ठ अधिकारियों का पैनल भेजना अनिवार्य है। इसी के तहत गृह विभाग ने 30 वर्ष की सेवा पूरी कर चुके आईपीएस अधिकारियों के नाम केंद्र को भेजे हैं।
बताया जा रहा है कि वर्ष 1990 से 1996 बैच के तीन दर्जन से अधिक अधिकारियों के नाम पैनल में शामिल हैं। आयोग इनमें से वरिष्ठता के आधार पर तीन नामों का चयन कर राज्य सरकार को भेजेगा, जिनमें से एक को डीजीपी नियुक्त किया जाएगा।
👤 ये हैं प्रमुख दावेदार
पैनल में शामिल प्रमुख नामों में वरिष्ठता के आधार पर 1990 बैच की रेणुका मिश्रा सबसे आगे हैं। वह वर्तमान में डीजी रैंक पर तैनात हैं और वीआरएस के लिए आवेदन भी कर चुकी हैं।
इसके अलावा 1991 बैच के आलोक शर्मा (डीजी, एसपीजी) और पीयूष आनंद (डीजी, एनडीआरएफ) के नाम भी प्रमुख दावेदारों में शामिल हैं।
आलोक शर्मा को उत्तर प्रदेश में लंबा फील्ड अनुभव है। उन्होंने प्रयागराज और हरिद्वार के महाकुंभ जैसे बड़े आयोजनों की सुरक्षा व्यवस्था संभाली है और मेरठ व प्रयागराज में आईजी के रूप में भी कार्य किया है।
🧭 क्या होगा आगे?
अब सभी की नजर संघ लोक सेवा आयोग की सिफारिश पर टिकी है। आयोग द्वारा भेजे जाने वाले तीन नामों में से राज्य सरकार अंतिम चयन करेगी।
अगर सब कुछ तय प्रक्रिया के अनुसार हुआ, तो जल्द ही उत्तर प्रदेश को चार साल बाद एक स्थायी डीजीपी मिल सकता है, जिससे पुलिस प्रशासन में स्थिरता आने की उम्मीद है।

