लखनऊ। प्रदेश में मरीजों को सुरक्षित और संक्रमणमुक्त रक्त उपलब्ध कराने के लिए खाद्य सुरक्षा एवं औषधि प्रशासन विभाग ने ब्लड बैंकों की निगरानी और सख्त कर दी है। विभाग की ओर से चलाए गए विशेष अभियान के दौरान चैरिटेबल सोसायटी द्वारा संचालित 200 ब्लड बैंकों की जांच की गई। जांच में कई तरह की अनियमितताएं सामने आने के बाद शुक्रवार को नई गाइडलाइन जारी की गई है।
नई व्यवस्था के तहत अब ब्लड बैंकों को रक्त के बल्क ट्रांसफर और ब्लड कंपोनेंट की आवश्यकता के संबंध में भी जानकारी देनी होगी। आपातकालीन परिस्थितियों को छोड़कर सभी रक्त सैंपलों की संक्रमण संबंधी जांच अनिवार्य रूप से एलिसा या केमिलुमिनेसेंस तकनीक से 100 प्रतिशत करनी होगी।
बल्क ट्रांसफर में पायलट ट्यूब जरूरी
खाद्य सुरक्षा एवं औषधि प्रशासन आयुक्त डॉ. रोशन जैकब की ओर से जारी निर्देशों के मुताबिक, प्रदेश के बाहर स्थित केंद्रों से ब्लड या ब्लड कंपोनेंट का बल्क ट्रांसफर प्राप्त करते समय मूल रक्त की 30 सेंटीमीटर पायलट ट्यूब संलग्न होना जरूरी होगा।
इसके अलावा प्राप्त रक्त की गुणवत्ता सुनिश्चित करने के लिए कम से कम एक प्रतिशत रक्त यूनिट का रैंडम परीक्षण भी किया जाएगा।
मरीजों की सुरक्षा पर जोर
विभाग का उद्देश्य ब्लड बैंकों में रक्त संग्रह, परीक्षण, भंडारण और ट्रांसफर की प्रक्रिया को अधिक सुरक्षित और पारदर्शी बनाना है। नई गाइडलाइन के जरिए यह सुनिश्चित करने का प्रयास किया जा रहा है कि मरीजों को संक्रमणमुक्त और गुणवत्तापूर्ण रक्त एवं ब्लड कंपोनेंट उपलब्ध हो सकें।
विभाग ने ब्लड बैंकों को नई व्यवस्था का कड़ाई से पालन करने के निर्देश दिए हैं।
