12 रबीउल अव्वल पर महफिल-ए-मिलाद और नातिया नशिस्त का आयोजन, दुरूद-ओ-सलाम की सदाओं से गूंजा खानकाह परिसर
आगरा। मेवा कटरा स्थित अस्ताना-ए-मैक़श खानकाह क़ादिरिया चिश्तिया नियाज़िया में 12 रबीउल अव्वल के मुबारक मौके पर जश्न-ए-ईद मिलादुन्नबी ﷺ का आयोजन पूरी अकीदत, मुहब्बत और रूहानी माहौल के साथ किया गया। कार्यक्रम खानकाह के सज्जादानशीन हजरत सैय्यद मुहम्मद अजमल अली शाह की सरपरस्ती में आयोजित हुआ।
जश्न-ए-मिलाद के अवसर पर आयोजित महफिल-ए-मिलाद और नातिया नशिस्त** में नातख्वानों ने बारगाह-ए-रिसालत ﷺ में नात-ए-पाक का नजराना पेश किया। महफिल के दौरान दुरूद-ओ-सलाम की सदाओं से पूरा माहौल रूहानी हो गया।
इस मौके पर शाहिद नदीम, माहिर अकबराबादी और हातिफ औरंगाबादी ने अपनी पुरअसर नातों के माध्यम से बारगाह-ए-रिसालत ﷺ में अकीदत का नजराना पेश किया। उपस्थित अकीदतमंदों ने भी दुरूद-ओ-सलाम पढ़कर अपनी मोहब्बत और अकीदत का इजहार किया।
सीरत-ए-मुस्तफा ﷺ को जिंदगी में उतारने का संदेश
खानकाह के सज्जादानशीन हजरत सैयद मोहम्मद अजमल अली शाह ने महफिल को संबोधित करते हुए कहा कि 12 रबीउल अव्वल का दिन पूरी इंसानियत के लिए बेहद मुबारक और अहम दिन है, क्योंकि इसी दिन सरवरे कायनात, रहमतुल्लिल-आलमीन हजरत मोहम्मद मुस्तफा ﷺ की विलादत हुई।
उन्होंने कहा कि हुजूर-ए-अकरम ﷺ ने इंसानियत को मोहब्बत, भाईचारे, अमन, रहम और नेक रास्ते पर चलने का संदेश दिया। हमें चाहिए कि हम केवल जश्न मनाने तक सीमित न रहें, बल्कि सीरत-ए-मुस्तफा ﷺ को अपनी जिंदगी में अपनाने की कोशिश करें।
उन्होंने कहा कि पैगंबर-ए-इस्लाम ﷺ ने दुनिया को अल्लाह की वहदानियत का पैगाम पहुंचाया और इंसानों को एक-दूसरे के साथ मोहब्बत और इंसाफ के साथ रहने की शिक्षा दी। इस महान संदेश को लोगों तक पहुंचाने में हुजूर ﷺ ने अनेक मुश्किलों और तकलीफों का सामना किया।
खानकाह के जानशीन ने किया मेहमानों का इस्तकबाल
खानकाह के जानशीन हजरत सैयद फैज अली शाह कादरी चिश्तिया नियाजिया और सैयद अंबर अली शाह कादरी चिश्तिया नियाजिया ने कार्यक्रम में पहुंचे तमाम मेहमानों, मुरीदीन और अकीदतमंदों का इस्तकबाल किया।
सैयद फैज अली शाह ने कहा कि आज पूरी दुनिया में अल्लाह के प्यारे महबूब हजरत मोहम्मद ﷺ की विलादत की खुशी में जश्न-ए-ईद मिलादुन्नबी मनाया जा रहा है। उन्होंने कहा कि यह खुशी तभी सार्थक होगी जब हम रसूल-ए-अकरम ﷺ की शिक्षाओं को अपनी जिंदगी का हिस्सा बनाएंगे।
उन्होंने कहा कि हुजूर ﷺ ने इंसानियत को एक-दूसरे से मोहब्बत करने, जरूरतमंदों की मदद करने, अमन कायम रखने और अच्छे अखलाक अपनाने की शिक्षा दी। इसलिए हमें अपनी व्यक्तिगत और सामाजिक जिंदगी में उनकी सीरत से रहनुमाई हासिल करनी चाहिए।
उन्होंने सभी अकीदतमंदों को जश्न-ए-ईद मिलादुन्नबी ﷺ की दिली मुबारकबाद पेश की।
मिलाद और जिक्र-ए-रसूल ﷺ ने बांधा समां
महफिल में दानिश नियाजी, ताबिश नियाजी और शारिक नियाजी ने भी मिलाद शरीफ पेश किया और जिक्र-ए-रसूल ﷺ किया। नात और मिलाद के दौरान अकीदतमंदों ने पूरी अकीदत के साथ दुरूद-ओ-सलाम का नजराना पेश किया।
महफिल के दौरान खानकाह का पूरा वातावरण रूहानी नजर आया और अकीदतमंदों ने पैगंबर-ए-इस्लाम ﷺ की सीरत और उनके बताए रास्ते पर चलने का संकल्प लिया।
फातिहा के बाद तकसीम हुआ लंगर
मिलाद शरीफ के समापन पर फातिहा हुई। इसके बाद खानकाह में आए मुरीदीन, मेहमानों और अकीदतमंदों के बीच लंगर तकसीम किया गया।
इस अवसर पर मुल्क में अमन, भाईचारे, खुशहाली और इंसानियत की बेहतरी के लिए दुआ भी की गई।
बड़ी संख्या में अकीदतमंद हुए शामिल
कार्यक्रम में मुख्य रूप से सैयद शब्बर अली शाह, सैयद महमूद उज्जमा, सैयद अली, सैयद यूसुफ, सैयद सऊद उज्जमा, सैयद दाऊद, सैयद मसूद अहमद, हाजी इम्तियाज, बरकत अली, जाहिद हुसैन, सनी, शादाब, ताज भाई, इलियास, अख्तर, जमाल अहमद, अनस, हमजा, लईक, एजाज, आमिर और अशरफ सहित बड़ी संख्या में अकीदतमंद मौजूद रहे।
पूरे कार्यक्रम के दौरान खानकाह परिसर नात, मिलाद, दुरूद-ओ-सलाम और जिक्र-ए-रसूल ﷺ से गूंजता रहा। अकीदतमंदों ने पैगंबर-ए-इस्लाम ﷺ की सीरत को अपनी जिंदगी में अपनाने और मोहब्बत, अमन व भाईचारे का पैगाम समाज तक पहुंचाने का संदेश दिया।
