कॉलेजों में तेज हुआ जनसंपर्क अभियान, छात्रों की समस्याओं से लेकर घोषणापत्र तक मुद्दों की तलाश
नई दिल्ली। दिल्ली विश्वविद्यालय छात्रसंघ (डूसू) चुनाव की तारीख जैसे-जैसे करीब आ रही है, दिल्ली विश्वविद्यालय के कॉलेज परिसरों में छात्र राजनीति का माहौल तेजी से गर्माने लगा है। छात्र संगठनों ने अपनी चुनावी तैयारियों को तेज करते हुए अब नए दाखिला लेने वाले छात्रों यानी फ्रेशर्स पर खास फोकस करना शुरू कर दिया है।
चुनाव मैदान में उतरने की तैयारी कर रहे संगठनों के पदाधिकारी और कार्यकर्ता अलग-अलग कॉलेजों में पहुंचकर विद्यार्थियों से सीधा संवाद कर रहे हैं। छात्रों की समस्याओं को समझने के साथ ही उनसे यह भी पूछा जा रहा है कि आगामी घोषणापत्र में किन मुद्दों को प्राथमिकता दी जानी चाहिए।
फ्रेशर्स क्यों बने चुनावी फोकस?
डीयू में हर साल बड़ी संख्या में नए छात्र दाखिला लेते हैं। ऐसे में छात्र संगठनों के लिए फ्रेशर्स एक महत्वपूर्ण छात्र वर्ग बन जाते हैं। नए विद्यार्थियों को कैंपस की राजनीति और छात्र संगठनों से जोड़ने के लिए अलग-अलग स्तर पर संपर्क अभियान चलाया जा रहा है।
छात्र नेताओं की कोशिश है कि शुरुआत से ही नए छात्रों की समस्याओं और अपेक्षाओं को अपने चुनावी एजेंडे में शामिल किया जाए। यही वजह है कि कॉलेज परिसरों में होने वाली बातचीत अब केवल प्रचार तक सीमित नहीं है, बल्कि छात्रों की राय और सुझाव जुटाने का माध्यम भी बन रही है।
NSUI ने उठाए बुनियादी सुविधाओं के मुद्दे
एनएसयूआई की ओर से भी विभिन्न कॉलेजों में छात्रों से संपर्क किया जा रहा है। संगठन के प्रचार अभियान में कॉलेजों के आधारभूत ढांचे, बेहतर वाई-फाई सुविधा, नियमित कक्षाएं और कैंटीन के भोजन की गुणवत्ता जैसे मुद्दों को प्रमुखता से उठाया जा रहा है।
छात्रों के बीच इन मुद्दों को लेकर संवाद करते हुए संगठन उन्हें अपने एजेंडे से जोड़ने की कोशिश कर रहा है। वहीं अन्य छात्र संगठन भी अपने-अपने मुद्दों के साथ विद्यार्थियों तक पहुंच बनाने में जुटे हैं।
मुद्दों की सियासत होगी अहम
इस बार डूसू चुनाव में केवल छात्र संगठनों की पारंपरिक राजनीतिक प्रतिस्पर्धा ही नहीं, बल्कि कैंपस की रोजमर्रा की समस्याएं भी महत्वपूर्ण भूमिका निभा सकती हैं। हॉस्टल, कक्षाएं, कैंटीन, इंटरनेट सुविधा, कॉलेज इंफ्रास्ट्रक्चर और छात्र सुविधाओं जैसे मुद्दे विद्यार्थियों के बीच चर्चा का विषय बन रहे हैं।
जैसे-जैसे चुनाव की तारीख नजदीक आएगी, छात्र संगठनों का जनसंपर्क अभियान और तेज होने की संभावना है। अब निगाह इस बात पर रहेगी कि फ्रेशर्स किस संगठन के मुद्दों और वादों पर भरोसा जताते हैं और डूसू की सियासत में नए छात्रों की भूमिका कितनी निर्णायक साबित होती है।
— टाइम्स ऑफ ताज
