दलित-पिछड़ा वर्ग को पार्टी से जोड़ने की रणनीति, सभी जिलाध्यक्षों को जारी हुए निर्देश
लखनऊ। उत्तर प्रदेश में आगामी विधानसभा चुनाव को लेकर कांग्रेस ने सामाजिक न्याय के मुद्दे को प्रमुखता से उठाने की तैयारी शुरू कर दी है। पार्टी सितंबर माह से प्रदेश के विभिन्न जिलों में 200 से ज्यादा सम्मेलनों का आयोजन करने जा रही है। इन सम्मेलनों के जरिए दलितों और पिछड़े वर्ग के लोगों को पार्टी से जोड़ने की रणनीति तैयार की गई है।
कांग्रेस ने इन सम्मेलनों के आयोजन की जिम्मेदारी पार्टी के विचार विभाग को सौंपी है। कार्यक्रमों को लेकर प्रदेश के सभी जिलों के जिलाध्यक्षों को आवश्यक दिशा-निर्देश जारी किए गए हैं।
सामाजिक न्याय के मुद्दे पर सड़कों पर उतरने की तैयारी
प्रदेश प्रभारी की जिम्मेदारी संभालने के बाद अपने पहले उत्तर प्रदेश दौरे में राजेंद्र पाल गौतम ने संकेत दिया था कि कांग्रेस सामाजिक न्याय के मुद्दे को लेकर प्रदेश में व्यापक अभियान चलाएगी। अब पार्टी ने इसी रणनीति को जमीन पर उतारने की तैयारी शुरू कर दी है।
कांग्रेस की योजना है कि प्रदेशभर में आयोजित होने वाले इन सम्मेलनों के माध्यम से सामाजिक न्याय, प्रतिनिधित्व और वंचित वर्गों से जुड़े मुद्दों पर चर्चा की जाए। इसके साथ ही पार्टी दलित और पिछड़े वर्ग के लोगों के बीच अपनी राजनीतिक पकड़ मजबूत करने का प्रयास करेगी।
पार्टी का मानना है कि सम्मेलनों के जरिए पहले संगठनात्मक और राजनीतिक माहौल तैयार किया जाए और इसके बाद सामाजिक न्याय के मुद्दे को लेकर बड़े स्तर पर आंदोलन या जनसंपर्क अभियान चलाया जाए।
जिला संगठन में बदलाव से पहले सम्मेलन कराने की तैयारी
कांग्रेस के विचार विभाग के प्रदेश अध्यक्ष एचएल दुसाध ने बताया कि विभाग के राष्ट्रीय अध्यक्ष कैप्टन प्रवीण डावर ने पिछले दिनों पार्टी मुख्यालय में वरिष्ठ नेताओं के साथ बैठक कर प्रस्तावित सम्मेलनों की तैयारियों की समीक्षा की है।
उन्होंने बताया कि कांग्रेस संगठन में जल्द ही 30 से 40 प्रतिशत जिलाध्यक्षों को बदले जाने की संभावना है। ऐसे में पार्टी की कोशिश है कि संगठनात्मक बदलाव से पहले अधिक से अधिक सम्मेलनों का आयोजन पूरा कर लिया जाए।
2027 के लिए संगठन मजबूत करने पर जोर
उत्तर प्रदेश में 2027 के विधानसभा चुनाव को देखते हुए कांग्रेस लगातार अपने संगठन को मजबूत करने और विभिन्न सामाजिक वर्गों के बीच पहुंच बढ़ाने की कोशिश कर रही है। 200 से अधिक सम्मेलनों का प्रस्ताव इसी व्यापक रणनीति का हिस्सा माना जा रहा है।
इन कार्यक्रमों के जरिए पार्टी सामाजिक न्याय के मुद्दे को गांव और ब्लॉक स्तर तक ले जाने के साथ-साथ कार्यकर्ताओं को भी सक्रिय करने की तैयारी में है। आने वाले महीनों में इन सम्मेलनों के जरिए कांग्रेस किस तरह अपना राजनीतिक आधार मजबूत करती है, इस पर सभी की नजर रहेगी।
