55 दावेदारों में मची हलचल, रायशुमारी के बाद दोनों पदों के लिए छह-छह नाम शॉर्टलिस्ट किए जाने की चर्चा
आगरा। कांग्रेस में संगठनात्मक बदलाव को लेकर आगरा की सियासत गर्म हो गई है। जिलाध्यक्ष और महानगर अध्यक्ष की कुर्सी की दौड़ अब आगरा से निकलकर दिल्ली स्थित कांग्रेस हाईकमान तक पहुंच गई है। संगठन सृजन अभियान की राष्ट्रीय ऑब्जर्वर एवं भरतपुर सांसद संजना जाटव ने आगरा में करीब एक सप्ताह तक संगठन की नब्ज टटोलने के बाद अपनी रिपोर्ट एआईसीसी को सौंप दी है।
दिल्ली स्थित कांग्रेस मुख्यालय में संजना जाटव ने संगठन महासचिव केसी वेणुगोपाल और प्रदेश प्रभारी राजेंद्र पाल गौतम को आगरा संगठन से संबंधित रिपोर्ट दी। रिपोर्ट हाईकमान तक पहुंचते ही दोनों महत्वपूर्ण पदों के दावेदारों की सक्रियता भी बढ़ गई है।
55 दावेदारों ने किया था आवेदन
आगरा कांग्रेस में जिलाध्यक्ष पद के लिए 25 और महानगर अध्यक्ष पद के लिए 30 दावेदारों ने आवेदन किया था। संगठन सृजन अभियान के तहत पर्यवेक्षक संजना जाटव ने आगरा प्रवास के दौरान वरिष्ठ नेताओं, पूर्व पदाधिकारियों, कार्यकर्ताओं और संगठन से जुड़े लोगों से बातचीत कर संभावित नेतृत्व को लेकर फीडबैक लिया।
बताया जा रहा है कि व्यापक रायशुमारी और संगठन की समीक्षा के बाद जिलाध्यक्ष और महानगर अध्यक्ष पद के लिए छह-छह नाम शॉर्टलिस्ट किए गए हैं। हालांकि इन 12 नामों की आधिकारिक सूची अभी कांग्रेस की ओर से सार्वजनिक नहीं की गई है।
कई पुराने और सक्रिय चेहरों पर चर्चा
रायशुमारी और संगठनात्मक बैठकों के दौरान आगरा कांग्रेस के कई पुराने एवं सक्रिय नेताओं के नाम चर्चा में रहे। इनमें रामनाथ सिकरवार, अमित सिंह, प्रदीप माथुर, डॉ. मधुरिमा शर्मा, राघवेंद्र सिंह मीनू, अश्विनी जैन, राम टंडन, अनुज शिवहरे, याकूब शेख, अदनान कुरैशी, सचिन चौधरी, मनोज जैन बोहरा, ओमवीर यादव, बुरहान शमशी, मुकेश डांगुर, नम्रता दान, गीता सिंह और ताहिर हुसैन सहित कई नाम शामिल बताए जा रहे हैं।
हालांकि इनमें से कौन-कौन से नाम जिलाध्यक्ष की छह सदस्यीय सूची में और कौन से नाम महानगर अध्यक्ष की छह सदस्यीय सूची में शामिल हैं, इसकी आधिकारिक पुष्टि अभी नहीं हुई है।
दिल्ली पहुंची रिपोर्ट, बढ़ी दावेदारों की धड़कन
संजना जाटव की रिपोर्ट दिल्ली पहुंचने के बाद आगरा कांग्रेस में नई हलचल देखने को मिल रही है। दावेदार अब वरिष्ठ नेताओं के संपर्क में हैं और अपने-अपने स्तर पर हाईकमान तक अपनी दावेदारी मजबूत करने की कोशिश कर रहे हैं।
किसी दावेदार की ताकत उसका पुराना संगठनात्मक अनुभव है तो कोई लंबे समय से पार्टी के लिए सक्रिय रहने को अपनी सबसे बड़ी योग्यता बता रहा है। वहीं कुछ दावेदार समर्थकों के जरिए भी अपनी राजनीतिक और संगठनात्मक पकड़ का संदेश देने में जुटे हैं।
किसके सिर सजेगा ताज?
आगरा कांग्रेस के लिए जिलाध्यक्ष और महानगर अध्यक्ष का चुनाव इसलिए भी महत्वपूर्ण माना जा रहा है क्योंकि आने वाले समय में पार्टी को संगठन को बूथ स्तर तक मजबूत करने के साथ-साथ राजनीतिक चुनौतियों का सामना करना है।
अब कांग्रेस कार्यकर्ताओं और दावेदारों की निगाहें दिल्ली पर टिकी हैं। हाईकमान शॉर्टलिस्ट किए गए नामों में से किसे जिले और महानगर की कमान सौंपता है, इस पर सभी की नजर है।
फिलहाल आधिकारिक घोषणा का इंतजार है, लेकिन आगरा कांग्रेस में एक सवाल सबसे ज्यादा चर्चा में है—आखिर जिले और महानगर की कमान किसके हाथ में जाएगी?
