नई दिल्ली, 10 सितंबर 2026।
जामिया मिल्लिया इस्लामिया के हिंदी विभाग के प्रोफेसर एवं चर्चित शायर रहमान मुसव्विर को वर्ष 2026 के प्रतिष्ठित ‘हंस ग़ज़ल सम्मान’ से सम्मानित किया गया। प्रसिद्ध लेखक राजेंद्र यादव की स्मृति में विभिन्न साहित्यिक विधाओं में प्रदान किए जाने वाले सम्मानों की कड़ी में यह सम्मान उन्हें प्रसिद्ध शायर प्रो. शाहपर रसूल के हाथों प्रदान किया गया।
नई दिल्ली स्थित इंडिया इंटरनेशनल सेंटर के कमला देवी सभागार में आयोजित गरिमापूर्ण समारोह में साहित्य जगत की अनेक जानी-मानी हस्तियों ने शिरकत की। सम्मान प्रदान करते हुए प्रो. शाहपर रसूल ने कहा कि रहमान मुसव्विर की ग़ज़लें फ़न, ज़बान और समग्र प्रभाव के स्तर पर वियोग, याद, नदामत और अंदरूनी बेचैनी जैसे भावों को बेहद संतुलित और मुहज़्ज़ब लहजे में अभिव्यक्त करती हैं।
समारोह में हंस के संपादक संजय सहाय, हंसाक्षर की मुख्य ट्रस्टी रचना यादव, प्रख्यात आलोचक पुरुषोत्तम अग्रवाल, कवयित्री सुमन केसरी, कवि मदन कश्यप, लेखक प्रभात रंजन, शायर मुईन शादाब, शायर शाहिद अंजुम, कहानीकार राकेश बिहारी, कहानीकार अजय नावरिया, लेखिका मृदुला गर्ग, लेखिका गीताश्री और कवयित्री शोभा अक्षर सहित साहित्य जगत की अनेक हस्तियां एवं बड़ी संख्या में साहित्य प्रेमी मौजूद रहे।
सहारनपुर से जामिया तक का साहित्यिक सफर
मूल रूप से कैलाशपुर, सहारनपुर (उत्तर प्रदेश) के रहने वाले प्रो. रहमान मुसव्विर ने सहारनपुर के इस्लामिया इंटर कॉलेज, महाराज सिंह कॉलेज और जे.वी. जैन कॉलेज से शिक्षा प्राप्त की। इसके बाद उन्होंने जामिया मिल्लिया इस्लामिया से ‘पाकिस्तानी उर्दू कथा साहित्य में भारतीय मिथक’ विषय पर प्रो. असग़र वजाहत के निर्देशन में पीएचडी की।
रहमान मुसव्विर हिंदी और उर्दू शायरी के प्रतिष्ठित नामों में शुमार हैं। उन्होंने रेडियो, टेलीविजन और फिल्मों के लिए स्क्रिप्ट एवं गीत लेखन भी किया है। देश-विदेश के विभिन्न हिंदी-उर्दू साहित्यिक मंचों पर उनकी शायरी की प्रस्तुतियां लगातार होती रही हैं।
‘हंस ग़ज़ल सम्मान 2026’ से पहले भी रहमान मुसव्विर को ‘काव्य सुमन अलंकरण’ और ‘नूरे-ग़ज़ल सम्मान’ सहित कई साहित्यिक सम्मानों से नवाजा जा चुका है।
रहमान मुसव्विर को मिला यह सम्मान हिंदी-उर्दू साहित्य के बीच संवाद और साझा साहित्यिक परंपरा की खूबसूरत मिसाल के रूप में भी देखा जा रहा है।
