पीडीए के बाद दलितों तक पहुंच बढ़ाने की कवायद, रामजीलाल सुमन को मिली आयोजन की कमान
लखनऊ/आगरा। वर्ष 2024 के लोकसभा चुनाव में पीडीए (पिछड़ा, दलित और अल्पसंख्यक) के जरिए मिली राजनीतिक बढ़त के बाद समाजवादी पार्टी अब दलित समाज के बीच अपनी पहुंच और मजबूत करने की रणनीति पर काम कर रही है। इसी कड़ी में 15 नवंबर को आगरा में पश्चिमी उत्तर प्रदेश के दलित महासम्मेलन का आयोजन प्रस्तावित है। सम्मेलन में सपा के राष्ट्रीय अध्यक्ष अखिलेश यादव के शामिल होने की बात सामने आई है।
पश्चिमी उत्तर प्रदेश की दलित राजनीति में आगरा को महत्वपूर्ण केंद्र माना जाता है। खासतौर पर जाटव समाज की यहां उल्लेखनीय राजनीतिक मौजूदगी रही है। सपा का यह सम्मेलन पश्चिमी यूपी के विभिन्न जिलों से दलित समाज के लोगों को एक मंच पर लाने के प्रयास के रूप में देखा जा रहा है।
रामजीलाल सुमन संभाल रहे हैं कमान
सम्मेलन की जिम्मेदारी सपा के राष्ट्रीय महासचिव एवं राज्यसभा सदस्य रामजीलाल सुमन को दी गई है। वह पश्चिमी उत्तर प्रदेश के विभिन्न जिलों में संपर्क कर सम्मेलन की तैयारियों को गति दे रहे हैं। पार्टी संगठन भी गांव और जिला स्तर पर संपर्क अभियान के जरिए अधिक से अधिक लोगों को कार्यक्रम से जोड़ने में जुटा है।
सपा की रणनीति में जाटव समाज के साथ-साथ अन्य दलित समुदायों तक पहुंच बनाने पर भी जोर है। पार्टी का प्रयास है कि दलित समाज से जुड़े मुद्दों, सामाजिक न्याय और पीडीए की राजनीति को आगामी विधानसभा चुनाव की तैयारियों से जोड़ा जाए।
नीले रंग और आंबेडकरवादी प्रतीकों पर भी ज़ोर
दलित समाज तक पहुंच बनाने की सपा की कोशिशों में राजनीतिक प्रतीकों की भूमिका भी नजर आ रही है। अखिलेश यादव के नीले गमछे और पार्टी के कुछ कार्यक्रमों में नीले रंग के इस्तेमाल को आंबेडकरवादी एवं बहुजन राजनीति से जोड़कर देखा जा रहा है। समाजवादी छात्रसभा की नीली यूनिफॉर्म को भी इसी रणनीति के हिस्से के तौर पर देखा गया है।
आगरा क्यों बना केंद्र?
आगरा लंबे समय से दलित और बहुजन राजनीति का महत्वपूर्ण केंद्र रहा है। उपलब्ध चुनावी आंकड़ों के अनुसार जिले की विधानसभा राजनीति में दलित मतदाताओं की महत्वपूर्ण भूमिका रही है। 2024 के लोकसभा चुनाव के बाद सपा अब 2027 के विधानसभा चुनाव की तैयारियों के तहत इस सामाजिक समूह के बीच अपना संगठनात्मक आधार बढ़ाने पर जोर दे रही है।
हालांकि दलित राजनीति में सपा के सामने बहुजन समाज पार्टी की ऐतिहासिक राजनीतिक मौजूदगी और भाजपा की विभिन्न दलित समूहों के बीच संगठनात्मक पहुंच जैसी चुनौतियां भी हैं। ऐसे में 15 नवंबर का आगरा महासम्मेलन सपा की दलित outreach रणनीति का एक प्रमुख राजनीतिक कार्यक्रम माना जा रहा है।
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