सपा अध्यक्ष ने चुनाव आयोग की कार्यप्रणाली पर उठाए सवाल, SIR और मतदाता सूची में नाम हटाए जाने को लेकर लगाए गंभीर आरोप
लखनऊ। समाजवादी पार्टी के राष्ट्रीय अध्यक्ष अखिलेश यादव ने मुख्य चुनाव आयुक्त ज्ञानेश कुमार की कार्यशैली को लेकर सवाल उठाते हुए कहा है कि उनके कार्यकाल में आगे चुनाव नहीं कराए जाने चाहिए। अखिलेश यादव की यह प्रतिक्रिया उन रिपोर्टों के बाद सामने आई है, जिनमें चुनाव आयुक्तों सुखबीर सिंह संधू और विवेक जोशी द्वारा पिछले 10 महीनों में आयोग के कुछ फैसलों पर कम से कम 14 बार औपचारिक आपत्ति दर्ज किए जाने की बात कही गई है।
सपा कार्यालय में मीडिया से बातचीत के दौरान अखिलेश यादव ने आरोप लगाया कि चुनाव आयोग के भीतर ही फैसलों को लेकर आपत्तियां दर्ज होना गंभीर विषय है। उन्होंने मुख्य चुनाव आयुक्त पर सत्ता के प्रभाव में काम करने का आरोप लगाते हुए इसे लोकतांत्रिक संस्थाओं के लिए चिंता का विषय बताया।
हालांकि, चुनाव आयोग से जुड़े सूत्रों ने इन मतभेदों की अलग व्याख्या की है। आयोग की ओर से कहा गया है कि SIR सहित सभी प्रमुख निर्णय तीनों चुनाव आयुक्तों की मंजूरी से लिए गए और दर्ज की गई आपत्तियां निर्णय लेने की सामान्य प्रक्रिया का हिस्सा थीं।
सुलतानपुर में मतदाता सूची को लेकर आरोप
अखिलेश यादव ने सुलतानपुर में मतदाता सूची से नाम हटाए जाने को लेकर भी गंभीर आरोप लगाए। उन्होंने दावा किया कि कथित तौर पर फर्जी हस्ताक्षर के माध्यम से बड़ी संख्या में मतदाताओं के नाम हटाए गए। उन्होंने ‘दशरथ’ नाम के व्यक्ति के हस्ताक्षर का हवाला देते हुए एक मामले में करीब 100 वोट हटाए जाने का आरोप लगाया।
उन्होंने कहा कि समाजवादी पार्टी ने 2022 के विधानसभा चुनाव के बाद बड़ी संख्या में शपथपत्रों के माध्यम से शिकायतें दर्ज कराई थीं, लेकिन उनके अनुसार उन शिकायतों पर अपेक्षित कार्रवाई नहीं हुई।
SIR को लेकर भी उठाए सवाल
सपा प्रमुख ने विशेष गहन पुनरीक्षण यानी SIR को लेकर भी चुनाव आयोग की प्रक्रिया पर सवाल उठाए। उनका आरोप है कि मतदाता सूची के पुनरीक्षण के दौरान समाजवादी पार्टी से जुड़े मतदाताओं के नाम प्रभावित हुए हैं।
रिपोर्टों के अनुसार, चुनाव आयुक्तों की ओर से दर्ज आपत्तियों में मतदाता पंजीकरण, नाम हटाने और बहाल करने, Form 6 में बदलाव तथा चुनावी डेटा के प्रबंधन जैसे मुद्दे शामिल रहे हैं।
उपचुनाव और प्रशासनिक व्यवस्था पर भी निशाना
अखिलेश यादव ने उत्तर प्रदेश में हुए उपचुनावों में सरकारी मशीनरी के कथित दुरुपयोग का आरोप भी लगाया। उन्होंने पश्चिम बंगाल में केंद्रीय बलों की तैनाती को लेकर भी सवाल उठाए और चुनाव प्रक्रिया की निष्पक्षता पर अपनी आपत्ति दर्ज कराई।
उन्होंने कहा कि चुनावी प्रक्रिया में समाज के वंचित वर्गों से जुड़े अधिकारियों की पर्याप्त भागीदारी नहीं है। साथ ही प्रदेश में अपराध और डिजिटल फ्रॉड के मुद्दे को उठाते हुए उन्होंने आरोप लगाया कि प्रशासनिक स्तर पर अधिकारियों के तबादले और तैनाती का इस्तेमाल चुनावी प्रक्रिया को प्रभावित करने के लिए किया जा रहा है।
अयोध्या में विस्थापन का मुद्दा उठाया
सपा अध्यक्ष ने अयोध्या में 14 कोसी परिक्रमा मार्ग के विस्तार से जुड़े निर्माण कार्यों का मुद्दा भी उठाया। उन्होंने आरोप लगाया कि जनौरा बाइपास क्षेत्र में गरीब परिवारों की बस्तियां प्रभावित हो रही हैं।
अखिलेश यादव ने कहा कि यदि समाजवादी पार्टी को प्रदेश में शासन का अवसर मिलता है तो अयोध्या के विकास में विस्थापन के बजाय पुनर्वास और नागरिक सुविधाओं को प्राथमिकता देने की नीति अपनाई जाएगी।
Times of Taj | लखनऊ
डिस्क्लेमर: इस समाचार में राजनीतिक नेताओं एवं संबंधित पक्षों द्वारा व्यक्त किए गए आरोप, दावे और प्रतिक्रियाएं उनके बयानों/उपलब्ध रिपोर्टों के आधार पर प्रस्तुत की गई हैं। Times of Taj इन दावों को स्वतंत्र रूप से सत्यापित तथ्य के रूप में प्रस्तुत नहीं करता। संबंधित पक्षों के आधिकारिक स्पष्टीकरण एवं उपलब्ध तथ्यों को समाचार में यथासंभव शामिल किया गया है। किसी तथ्य या सूचना में अनजाने में त्रुटि पाए जाने पर सत्यापन के बाद आवश्यक संशोधन किया जा सकता है।
