SIR को लेकर जारी बहस के बीच AIMIM प्रमुख ने एक्स पर जताई चिंता, चुनाव आयोग ने कहा—अंतिम फैसले सर्वसम्मति से लिए जाते हैं
नई दिल्ली। ऑल इंडिया मजलिस-ए-इत्तेहादुल मुस्लिमीन (AIMIM) के अध्यक्ष एवं सांसद असदुद्दीन ओवैसी ने चुनाव आयोग की कार्यप्रणाली और उसके फैसलों को लेकर सवाल उठाए हैं। उन्होंने कहा कि यदि आयोग के बहुमत सदस्यों को ही उन निर्णयों की जानकारी नहीं थी, जो उनके नाम पर लिए गए, तो ऐसे फैसलों की वैधता पर सवाल उठना स्वाभाविक है।
ओवैसी ने बुधवार को सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म एक्स पर पोस्ट करते हुए कहा कि एक समय देश के बड़े हिस्से में चुनाव आयोग के प्रति भरोसा था, लेकिन समय के साथ इसमें कमी आई है। उन्होंने आयोग की पारदर्शिता और जवाबदेही को लेकर भी सवाल उठाए।
AIMIM प्रमुख ने विशेष गहन पुनरीक्षण यानी SIR का जिक्र करते हुए आरोप लगाया कि पिछले एक वर्ष के दौरान इसकी प्रक्रिया ने गरीब तबके के लोगों के सामने मुश्किलें खड़ी की हैं। उनके अनुसार, नागरिकों को केवल दस्तावेजों के आधार पर परखा जाना चिंता का विषय है।
ओवैसी ने अपनी पोस्ट में सवाल उठाया कि पहले यह पूछा जाता था कि निगरानी करने वालों पर नजर कौन रखेगा, लेकिन अब सवाल यह है कि निगरानी करने वाला भी है या नहीं।
चुनाव आयोग ने दी सफाई
ओवैसी की टिप्पणी ऐसे समय आई है जब SIR को लेकर चुनाव आयोग के भीतर कथित मतभेदों की रिपोर्ट सामने आई है। रिपोर्टों में दो चुनाव आयुक्तों द्वारा कुछ प्रक्रियाओं और निर्णयों पर आपत्तियां दर्ज किए जाने की बात कही गई है।
वहीं, चुनाव आयोग ने इन रिपोर्टों के संदर्भ में कहा है कि बहु-सदस्यीय संवैधानिक संस्था में अलग-अलग राय, सुझाव और टिप्पणियां निर्णय प्रक्रिया का सामान्य हिस्सा हैं। आयोग के अनुसार, उसके अंतिम आदेश और निर्णय निर्धारित कानूनी प्रक्रिया के तहत लिए जाते हैं और सभी अंतिम निर्णय सर्वसम्मति से लिए गए हैं।
SIR को लेकर राजनीतिक दलों और चुनाव आयोग के बीच जारी बहस के बीच ओवैसी का बयान चुनावी प्रक्रिया में पारदर्शिता और जवाबदेही के मुद्दे को फिर चर्चा में ले आया है।
Times of Taj
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