
सूफ़ी सम्मेलन में अमन, मोहब्बत, हिंदू-मुस्लिम एकता और राष्ट्रीय सद्भाव को मज़बूत करने का संकल्प

नागौर शरीफ़, राजस्थान। हज़रत ख़्वाजा ग़रीब नवाज़ रहमतुल्लाह अलैह के ख़ास ख़लीफ़ा हज़रत ख़्वाजा हमीदुद्दीन चिश्ती नागौरी रहमतुल्लाह अलैह के 775वें उर्स-ए-मुबारक के अवसर पर नागौर शरीफ़ में आयोजित भारतीय सूफ़ी सम्मेलन “मेरा मुल्क, मेरी पहचान” में देशभर से आए सूफ़ी सज्जादानशीनों, दरगाहों के प्रमुखों, धर्मगुरुओं और हज़ारों जायरीनों ने शिरकत की। सम्मेलन में अजमेर शरीफ़ दरगाह के प्रमुख के उत्तराधिकारी एवं ऑल इंडिया सूफ़ी सज्जादानशीन काउंसिल के चेयरमैन हज़रत सैयद नसीरुद्दीन चिश्ती साहब ने अमन, मोहब्बत, आपसी भाईचारे और राष्ट्रीय एकता का संदेश दिया।

हज़रत सैयद नसीरुद्दीन चिश्ती ने अपने संदेश में कहा कि “भारत तभी मज़बूत होगा, जब हर धर्म का नागरिक गर्व से कहे—यह देश मेरा है और इसकी एकता मेरी ज़िम्मेदारी है।”
उन्होंने कहा कि “मेरा मुल्क, मेरी पहचान” मुहिम का उद्देश्य सूफ़ी संतों की मोहब्बत, इंसानियत और भाईचारे की शिक्षाओं को देश के कोने-कोने तक पहुँचाना तथा विभिन्न धर्मों और समुदायों के लोगों को साझा राष्ट्रीय पहचान के सूत्र में जोड़ना है। भारत की असली ताक़त उसकी विविधता, साझा संस्कृति और नागरिकों के बीच आपसी सम्मान में निहित है।

सूफ़ी परंपरा का पैग़ाम—नफ़रत नहीं, मोहब्बत
सम्मेलन में इस बात पर ज़ोर दिया गया कि धार्मिक आयोजन, दरगाहों के उर्स और सूफ़ी सम्मेलन केवल आध्यात्मिक आस्था के केंद्र नहीं, बल्कि समाज में प्रेम, विश्वास, इंसानियत और आपसी सद्भाव को बढ़ावा देने के महत्वपूर्ण माध्यम भी हैं।

सूफ़ी संतों की शिक्षाएँ इंसान को रहमदिली, दूसरों की ख़िदमत और बेहतर किरदार अपनाने की प्रेरणा देती हैं। समाज की वास्तविक मज़बूती तभी संभव है, जब लोग एक-दूसरे की आस्था का सम्मान करें और मिल-जुलकर देश की तरक़्क़ी में योगदान दें।
सूफ़ी विरासत से राष्ट्रीय एकता तक
हज़रत ख़्वाजा हमीदुद्दीन चिश्ती नागौरी रहमतुल्लाह अलैह की रूहानी विरासत का उल्लेख करते हुए सूफ़ी परंपरा की उस भूमिका को रेखांकित किया गया, जिसने सदियों से विभिन्न समुदायों के बीच मोहब्बत, अकीदत और भाईचारे के रिश्तों को मज़बूत किया है।
दरगाहों की साझा सांस्कृतिक परंपरा भारत की गंगा-जमुनी तहज़ीब और सामाजिक सद्भाव की अहम मिसाल है। वक्ताओं ने कहा कि वर्तमान दौर में नफ़रत के बजाय मोहब्बत, टकराव के बजाय संवाद और विभाजन के बजाय एकता को प्राथमिकता देना बेहद ज़रूरी है।

युवाओं से भी अपील की गई कि वे शिक्षा, सामाजिक सेवा और सकारात्मक संवाद के माध्यम से देश के उज्ज्वल भविष्य के निर्माण में अपनी भूमिका निभाएँ।

सभी धर्मगुरुओं ने मुहिम को मज़बूत करने का लिया संकल्प
कार्यक्रम में विभिन्न धर्मों के धर्मगुरुओं और दरगाहों के सज्जादानशीनों ने अपने विचार रखे तथा “मेरा मुल्क, मेरी पहचान” मुहिम को और मज़बूत करने का संकल्प लिया। सम्मेलन में देश की एकता और अखंडता की रक्षा, सभी नागरिकों के सम्मान तथा समाज में अमन और भाईचारे को बढ़ावा देने का सामूहिक संदेश दिया गया।
वक्ताओं ने कहा कि हमारा मज़हब हमें इंसानियत सिखाए, हमारी आस्था हमें मोहब्बत का रास्ता दिखाए और हमारी देशभक्ति हमें एक-दूसरे के और क़रीब लाए।
“मेरा मुल्क, मेरी पहचान—अमन हमारी ताक़त, मोहब्बत हमारा पैग़ाम और भाईचारा हमारी शान।”
सम्मेलन में शामिल प्रमुख हस्तियाँ
- जनाब मोहम्मद सूफ़ी जमाल अख़्तर चिश्ती अलफ़ारूक़ी साहब, सज्जादानशीन, दरगाह हज़रत ख़्वाजा सूफ़ी हमीदुद्दीन नागौरी।
- जनाब सैयद हबीबुर्रहमान नियाज़ी साहब, सज्जादानशीन, दरगाह हज़रत मीर कुर्बान अली शाह (रह.), जयपुर।
- जनाब पीर ग़ुलाम नजमी फ़ारूक़ी चिश्ती, नायब सज्जादानशीन, दरगाह हज़रत ख़्वाजा सूफ़ी कमालुद्दीन चिश्ती, झुंझुनूं।
- जनाब पीर ग़ुलाम नसीर नजमी सुलेमानी चिश्ती अलफ़ारूक़ी, सज्जादानशीन एवं मुतवल्ली, दरगाह हज़रत ख़्वाजा हाजी मुहम्मद नजमुद्दीन साहब, फ़तेहपुर शेखावाटी।
- पीर नज़मुल हसन नजमी चिश्ती, सज्जादानशीन, दरगाह हज़रत ख़्वाजा अब्दुल लतीफ़ शाह चिश्ती साहब, जोधपुर।
- पीर सैयद इरफ़ान शाह साहब जलाली सुलेमानी चिश्ती, सज्जादानशीन एवं मुतवल्ली, दरगाह जामसर, बीकानेर।
- जनाब मेअराज उस्मानी साहब, शहर क़ाज़ी, नागौर शरीफ़।
- हज़रत मिस्कीन मोईनुद्दीन मिस्किनी नियाज़ी साहब, सज्जादानशीन, दरगाह हज़रत ख़्वाजा राहत मिस्किनी फरहत मिस्किनी, जयपुर।
- पीर सैयद अज़ीज़ुद्दीन उर्फ़ बादशाह मियाँ, नायब सज्जादानशीन, दरगाह हज़रत मौलाना ज़ियाउद्दीन साहब, जयपुर।
- जनाब पीर सैयद सदाक़त अली जिलानी साहब, सज्जादानशीन, दरगाह बुंदू पीर साहब, नागौर शरीफ़।
- पीर एहतरामुद्दीन नजमी फ़ारूक़ी साहब।
- पीर रुआब चिश्ती साहब, जोधपुर।
- रमज़ान अली ख़ाँ, गद्दीनशीन, नौ कुंदी दरबार, पादूकलां, रियां बड़ी।
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