फिल्म रेटिंग: ★★★½ (3.5/5)
कलाकार: सोनाक्षी सिन्हा, जहीर इकबाल, अंकित गुप्ता, शर्लिन सेठ, जरीना वहाब और पूर्णेंदु भट्टाचार्य
लेखक एवं निर्देशक: करण रावल
बॉलीवुड में प्रेम कहानियां तो खूब बनती हैं, लेकिन जब प्यार की खूबसूरत दुनिया में जुनून, रहस्य और डर दस्तक देने लगें, तो कहानी का अंदाज ही बदल जाता है। सोनाक्षी सिन्हा और जहीर इकबाल अभिनीत फिल्म ‘तू है मेरी किरण’ इसी अलग अंदाज की रोमांटिक थ्रिलर है। निर्देशक करण रावल ने प्यार और जुनून के बीच की महीन रेखा को एक रहस्यमयी कहानी के जरिए प्रस्तुत करने का प्रयास किया है। फिल्म की सबसे बड़ी खूबी इसकी दिलचस्प कहानी और सोनाक्षी सिन्हा का प्रभावशाली अभिनय है।
कहानी में रोमांस भी, रहस्य भी

फिल्म की कहानी किरण (सोनाक्षी सिन्हा) और समर (जहीर इकबाल) के इर्द-गिर्द घूमती है। किरण एक लेखिका है, जिसकी जिंदगी में एक रहस्यमयी फोन के जरिए समर की एंट्री होती है। दिलचस्प बात यह है कि दोनों अलग-अलग समय में रह रहे हैं। एक साल 2016 में तो दूसरा 2026 में।
फोन पर शुरू हुआ यह अनोखा रिश्ता धीरे-धीरे भावनात्मक जुड़ाव में बदलने लगता है। लेकिन समर की मोहब्बत कब जुनून का रूप ले लेती है, यही फिल्म की कहानी में रोमांच पैदा करता है।
क्या प्यार के नाम पर किसी की जिंदगी को नियंत्रित करना सही है? क्या अतीत में किया गया बदलाव भविष्य की तकदीर बदल सकता है? ऐसे कई सवालों के साथ फिल्म दर्शकों को एक रहस्यमयी सफर पर ले जाती है।
सोनाक्षी सिन्हा ने एक बार फिर साबित की अपनी अभिनय क्षमता
फिल्म की सबसे बड़ी ताकत सोनाक्षी सिन्हा हैं। किरण के किरदार में उन्होंने अपनी अभिनय क्षमता के अलग-अलग रंग दिखाने का अवसर पाया है। एक आत्मविश्वासी महिला से लेकर असमंजस, भावनात्मक उलझन और डर का सामना करने वाली स्त्री तक, उनका किरदार कई परिस्थितियों से गुजरता है।
सोनाक्षी की खासियत यह है कि वह अपने किरदार को केवल संवादों के सहारे नहीं, बल्कि चेहरे के भाव और आंखों की अभिव्यक्ति से भी प्रभावशाली बनाने की क्षमता रखती हैं।
उनकी स्क्रीन प्रेजेंस कहानी को मजबूती देती है। खासकर किरण के जीवन में आने वाले अप्रत्याशित बदलावों के बीच सोनाक्षी का अभिनय फिल्म का प्रमुख आकर्षण बनकर उभरता है।
जहीर इकबाल ने भी छोड़ी अपनी छाप
जहीर इकबाल के लिए समर का किरदार एक दिलचस्प चुनौती है। उन्हें एक ऐसे युवक की भूमिका मिली है, जिसकी मोहब्बत धीरे-धीरे खतरनाक जुनून में बदलने लगती है।
जहीर ने अपने किरदार के रोमांटिक और नकारात्मक पहलुओं को प्रभावी ढंग से प्रस्तुत करने की कोशिश की है। सोनाक्षी और जहीर की ऑनस्क्रीन केमिस्ट्री भी फिल्म का आकर्षण है। वास्तविक जिंदगी की यह जोड़ी पर्दे पर एक अलग तरह के रिश्ते में दिखाई देती है।
बाकी कलाकारों का भी अच्छा सहयोग

अंकित गुप्ता ने किरण के पति के किरदार में अपनी भूमिका को सहजता से निभाया है। शर्लिन सेठ, अनुभवी अभिनेत्री जरीना वहाब और पूर्णेंदु भट्टाचार्य जैसे कलाकार फिल्म की स्टार कास्ट को मजबूती प्रदान करते हैं।
जरीना वहाब जैसे अनुभवी कलाकार की मौजूदगी फिल्म को एक अलग विश्वसनीयता देती है। सहयोगी कलाकारों का योगदान भी कहानी को आगे बढ़ाने में महत्वपूर्ण है।
निर्देशन और तकनीकी पक्ष

लेखक-निर्देशक करण रावल ने एक सामान्य प्रेम कहानी से हटकर रोमांस, रहस्य और मनोवैज्ञानिक थ्रिलर को एक साथ जोड़ने का प्रयास किया है।
दो अलग-अलग समय में रहने वाले किरदारों को एक रहस्यमयी फोन के जरिए जोड़ने का विचार फिल्म को दिलचस्प बनाता है। शुरुआती हिस्से में कहानी दर्शकों के मन में उत्सुकता जगाती है। हालांकि कुछ स्थानों पर पटकथा और अधिक स्पष्ट तथा कसी हुई हो सकती थी, लेकिन फिल्म का मूल विचार और कलाकारों का अभिनय इसकी खूबियों में शामिल हैं।
फिल्म प्यार के उस पहलू को सामने लाती है, जहां मोहब्बत और किसी को पाने की जिद के बीच का अंतर मिटने लगता है।
आखिर क्यों देखें फिल्म?
‘तू है मेरी किरण’ उन दर्शकों के लिए एक दिलचस्प विकल्प है, जो परंपरागत रोमांटिक फिल्मों से हटकर रहस्य, भावनाओं और मनोवैज्ञानिक रोमांच से भरपूर कहानी देखना पसंद करते हैं।
सोनाक्षी सिन्हा का प्रभावशाली अभिनय, जहीर इकबाल का अलग अंदाज, दोनों की केमिस्ट्री और कहानी का अनोखा विषय फिल्म के प्रमुख आकर्षण हैं।
कुल मिलाकर, ‘तू है मेरी किरण’ प्यार, जुनून और रहस्य का एक दिलचस्प सिनेमाई मिश्रण है। फिल्म में सोनाक्षी सिन्हा अपनी मजबूत स्क्रीन प्रेजेंस से विशेष प्रभावित करती हैं। अलग विषय पर बनी रोमांटिक थ्रिलर पसंद करने वाले दर्शकों के लिए यह फिल्म देखने लायक है।
