मिशिगन से अमेरिकी सीनेट पहुंचने वाले पहले मुस्लिम बने अब्दुल अल-सैयद, फ्लोरिडा से भारतीय मूल की पिया डंडिया ने भी जीता प्रतिनिधि सभा का चुनाव
वॉशिंगटन/लखनऊ। अमेरिकी मध्यावधि चुनाव के नतीजों में अब्दुल अल-सैयद और भारतीय मूल की पिया डंडिया की जीत चर्चा का विषय बन गई है। मिशिगन में डेमोक्रेटिक उम्मीदवार अब्दुल रहमान मोहम्मद अल-सैयद की जीत को अमेरिकी राजनीति में मुस्लिम प्रतिनिधित्व के लिहाज से ऐतिहासिक बताया जा रहा है। वहीं, फ्लोरिडा के 22वें कांग्रेसनल डिस्ट्रिक्ट से भारतीय मूल की डेमोक्रेटिक उम्मीदवार पिया डंडिया ने भी जीत दर्ज की है।
अब्दुल अल-सैयद की जीत पर ओवैसी का बयान
अब्दुल अल-सैयद की जीत के बाद AIMIM अध्यक्ष और सांसद असदुद्दीन ओवैसी ने उत्तर प्रदेश के मुस्लिम समाज को राजनीतिक भागीदारी बढ़ाने का संदेश दिया। उन्होंने मिशिगन की जीत का उदाहरण देते हुए कहा कि जब अमेरिका में एक ‘अब्दुल’ अपनी राजनीतिक पहचान स्थापित कर सकता है, तो उत्तर प्रदेश के ‘अब्दुल’ को भी अपनी राजनीतिक ताकत और हिस्सेदारी मजबूत करनी चाहिए।
ओवैसी ने अपने बयान में कहा कि ‘अब्दुल’ शब्द को ताने के रूप में इस्तेमाल करने की कोशिश की गई, लेकिन अब समय आ गया है कि समाज अपनी राजनीतिक पहचान और ताकत का एहसास कराए। उन्होंने कहा, “अब्दुल अल्लाह के सिवा किसी के सामने नहीं झुकता। अब हम और नमाज़ की चटाई नहीं बिछाएंगे।”
उनके इस बयान को उत्तर प्रदेश में मुस्लिम समाज के राजनीतिक प्रतिनिधित्व और स्वतंत्र राजनीतिक पहचान की अपील के रूप में देखा जा रहा है।
उच्च शिक्षा और सार्वजनिक स्वास्थ्य के क्षेत्र से राजनीति तक पहुंचे अल-सैयद
अब्दुल अल-सैयद ने मिशिगन यूनिवर्सिटी और कोलंबिया यूनिवर्सिटी से पढ़ाई की है। वह रोड्स स्कॉलर रहे हैं और ऑक्सफोर्ड यूनिवर्सिटी से डॉक्टरेट की उपाधि प्राप्त कर चुके हैं।
उनका चुनाव अभियान महंगाई, जीवन-यापन की बढ़ती लागत, स्वास्थ्य सेवाओं और आर्थिक असमानता जैसे मुद्दों पर केंद्रित रहा। उन्होंने सभी के लिए मेडिकेयर, इजराइल को अमेरिकी सैन्य सहायता समाप्त करने और चुनावी वित्तपोषण में सुधार जैसे मुद्दे भी उठाए।
इससे पहले वर्ष 2018 में वह मिशिगन के गवर्नर पद के लिए डेमोक्रेटिक प्राइमरी चुनाव में ग्रेचेन व्हिटमर से हार गए थे। इसके बाद उन्होंने पॉडकास्ट, लेखन और टेलीविजन के माध्यम से सार्वजनिक जीवन में अपनी सक्रियता बनाए रखी।
भारतीय मूल की पिया डंडिया ने फ्लोरिडा में दर्ज की जीत
अमेरिकी चुनाव में भारतीय मूल की डेमोक्रेटिक उम्मीदवार पिया डंडिया ने फ्लोरिडा के 22वें कांग्रेसनल डिस्ट्रिक्ट से अमेरिकी प्रतिनिधि सभा का चुनाव जीत लिया। उन्होंने रिपब्लिकन उम्मीदवार केसी असकर को हराया।
घोषित चुनावी आंकड़ों के अनुसार, पिया डंडिया को 51.9 प्रतिशत और उनके प्रतिद्वंद्वी को 48.1 प्रतिशत वोट मिले।
28 साल की उम्र में बनी थीं स्कूल की प्रिंसिपल
फ्लोरिडा के पाम बीच काउंटी में जन्मीं पिया डंडिया ने अपने करियर की शुरुआत शिक्षक के रूप में की थी। बाद में उन्होंने न्यूयॉर्क के हार्लेम में एक हाई स्कूल की प्रिंसिपल के रूप में काम किया।
महज 28 वर्ष की उम्र में वह एक हाई स्कूल की संस्थापक प्रिंसिपल बनीं। उन्होंने कम आय वाले परिवारों के बच्चों को बेहतर शिक्षा और आर्थिक आत्मनिर्भरता के अवसर उपलब्ध कराने पर काम किया। उनके चुनाव अभियान में शिक्षा, रोजगार और आर्थिक अवसर प्रमुख मुद्दे रहे।
अमेरिकी राजनीति में प्रतिनिधित्व की नई चर्चा
अब्दुल अल-सैयद और पिया डंडिया की जीत ने अमेरिकी राजनीति में विविध समुदायों की भागीदारी और प्रतिनिधित्व को लेकर नई चर्चा शुरू कर दी है। भारत में भी इन चुनावी नतीजों के बाद मुस्लिम समाज की राजनीतिक हिस्सेदारी, नेतृत्व और संगठनात्मक मजबूती का मुद्दा चर्चा में है।
अज़हर उमरी, वरिष्ठ पत्रकार
TIMES OF TAJ
डिस्क्लेमर: यह समाचार उपलब्ध सूचनाओं और संबंधित नेताओं के बयानों पर आधारित है। राजनीतिक विचार संबंधित व्यक्तियों के हैं।
