मिशिगन में अब्दुल अल-सैयद की ऐतिहासिक जीत का दिया उदाहरण; AIMIM नेता बोले– एक दिन अब्दुल उत्तर प्रदेश के मुख्यमंत्री और भारत के प्रधानमंत्री भी बनेंगे
लखनऊ/मुंबई। ऑल इंडिया मजलिस-ए-इत्तेहादुल मुस्लिमीन (AIMIM) के नेता वारिस पठान ने उत्तर प्रदेश में आगामी विधानसभा चुनावों से पहले मुस्लिम राजनीतिक प्रतिनिधित्व को लेकर बड़ा बयान दिया है। उन्होंने कहा कि मुसलमानों को केवल वोट बैंक समझे जाने की धारणा से बाहर निकलना होगा और राजनीति में अपनी भागीदारी बढ़ाकर खुद निर्वाचित जनप्रतिनिधि बनने की दिशा में आगे बढ़ना होगा।
8 नवंबर को दिए गए अपने बयान में वारिस पठान ने अमेरिका के मिशिगन राज्य में डेमोक्रेटिक नेता अब्दुल अल-सैयद की ऐतिहासिक जीत का उदाहरण देते हुए कहा कि मुस्लिम समुदाय को भी राजनीतिक नेतृत्व की जिम्मेदारी संभालने के लिए आगे आना चाहिए।
मिशिगन में अब्दुल की जीत को बताया प्रेरणादायक
वारिस पठान ने कहा कि मिशिगन में अब्दुल अल-सैयद ने जीत हासिल कर इतिहास बनाया है। वह अमेरिकी सीनेट के लिए निर्वाचित हुए हैं और अमेरिका के पहले मुस्लिम सीनेटर बनने जा रहे हैं। उन्होंने कहा कि यह जीत उन लोगों के लिए जवाब है, जो मुस्लिम पहचान को अपमानजनक टिप्पणी या ताने के रूप में इस्तेमाल करते हैं।
पठान के मुताबिक, अब मुसलमानों को केवल चुनावों में किसी पार्टी या उम्मीदवार को जिताने तक सीमित नहीं रहना चाहिए, बल्कि खुद चुनाव लड़कर सदन तक पहुंचना चाहिए और अपने समुदाय के साथ-साथ गरीबों, वंचितों तथा कमजोर वर्गों की आवाज बनना चाहिए।
‘एक दिन अब्दुल यूपी के मुख्यमंत्री और प्रधानमंत्री भी बनेंगे’
वारिस पठान ने अपने बयान में अब्दुल अल-सैयद की जीत को भारत के मुस्लिम युवाओं के लिए प्रेरणा बताते हुए कहा कि अब्दुल मुसलमानों और गरीबों की आवाज बनेंगे तथा न्याय के लिए संघर्ष करेंगे।
उन्होंने भविष्य की राजनीतिक संभावनाओं का उल्लेख करते हुए कहा कि एक दिन अब्दुल भारत के प्रधानमंत्री भी बन सकते हैं। उन्होंने यह भी कहा कि अब्दुल उत्तर प्रदेश के मुख्यमंत्री बनने की क्षमता भी रखते हैं।
पठान ने कहा कि जिस तरह अब्दुल ने मिशिगन में अपनी राजनीतिक पहचान बनाई है, उसी तरह भारत में भी मुस्लिम युवाओं को अपनी नेतृत्व क्षमता साबित करनी चाहिए।
‘अब्दुल पंचर बनाता है’ जैसी टिप्पणियों पर जताई नाराजगी
AIMIM नेता ने मुस्लिम समुदाय के खिलाफ इस्तेमाल की जाने वाली अपमानजनक रूढ़ियों और टिप्पणियों की आलोचना की। उन्होंने कहा कि कुछ लोग ‘अब्दुल’ नाम को ताने के रूप में इस्तेमाल करते हुए मुसलमानों को सीमित पेशों और सामाजिक पहचान से जोड़ने की कोशिश करते हैं।
उन्होंने कहा कि अब्दुल को लेकर की जाने वाली ऐसी टिप्पणियों का जवाब राजनीतिक सफलता और लोकतांत्रिक भागीदारी से दिया जाना चाहिए।
पठान के बयान का संदेश था कि मुस्लिम समुदाय को राजनीतिक व्यवस्था में अपनी प्रभावी भागीदारी सुनिश्चित करनी चाहिए और अपनी आवाज को लोकतांत्रिक संस्थाओं तक पहुंचाना चाहिए।
यूपी की राजनीति में मुस्लिम प्रतिनिधित्व फिर चर्चा में
उत्तर प्रदेश में आगामी विधानसभा चुनावों को देखते हुए मुस्लिम राजनीतिक प्रतिनिधित्व का सवाल एक बार फिर चर्चा में आ गया है। वारिस पठान का बयान इसी राजनीतिक बहस का हिस्सा है।
उनका जोर इस बात पर है कि मुस्लिम मतदाताओं की संख्या और चुनावी भागीदारी के साथ-साथ निर्वाचित प्रतिनिधियों के रूप में उनकी उपस्थिति भी महत्वपूर्ण है।
हालांकि, राजनीतिक प्रतिनिधित्व का सवाल केवल किसी एक समुदाय तक सीमित नहीं है। लोकतंत्र की मजबूती इस बात में है कि समाज के सभी वर्गों, गरीबों, महिलाओं, युवाओं और वंचित समुदायों को भी निर्णय लेने वाली संस्थाओं में उचित भागीदारी मिले।
मिशिगन में अब्दुल अल-सैयद की जीत ने भारतीय राजनीति में भी इस बहस को नई चर्चा दी है कि लोकतंत्र में पहचान से आगे बढ़कर राजनीतिक योग्यता, जनसमर्थन और नेतृत्व की भूमिका कितनी महत्वपूर्ण है।
TIMES OF TAJ डिस्क्लेमर: यह समाचार उपलब्ध मीडिया रिपोर्टों एवं संबंधित नेताओं के सार्वजनिक बयानों पर आधारित है।
