नई दिल्ली। जमीयत उलमा-ए-हिंद के अध्यक्ष मौलाना अरशद मदनी ने हालिया अमेरिका इजरायल के चुनाव नतीजों पर अपनी प्रतिक्रिया व्यक्त करते हुए कहा कि सत्ता हासिल करने और उसे बनाए रखने के लिए धर्म के नाम पर नफरत फैलाने, इंसानों को बांटने तथा अत्याचार और दमन को राजनीति का हथियार बनाने वालों के लिए इजरायल और अमेरिका के हालिया चुनावी नतीजे दुनिया भर में नफरत, जुल्म और धार्मिक कट्टरता की राजनीति करने वालों के लिए सबक हैं।
डोनाल्ड ट्रंप द्वारा अब्दुल रहमान अल-सैयद के खिलाफ चलाए गए नकारात्मक प्रचार के (कभी जिहादी, कभी शरीयत कानून लागू करने का इरादा रखने वाला और कभी अमेरिका की सुरक्षा के लिए खतरा बताने के बावजूद) अब्दुल रहमान अल-सैयद की ऐतिहासिक कामयाबी ने साबित कर दिया कि नफरत पर इंसानियत और इंसाफ की जीत हो सकती है। इन चुनावी नतीजों ने स्पष्ट संदेश दिया है कि जनता को हमेशा भय, पक्षपातपूर्ण और नफरत के सहारे गुमराह नहीं किया जा सकता।
मौलाना मदनी ने कहा कि फिलिस्तीन के गाज़ा में मासूम बच्चों, महिलाओं और निहत्थे नागरिकों का नरसंहार, बस्तियों की तबाही, भूख और बेघर होने के भयावह दृश्यों ने पूरी दुनिया के इंसाफ पसंद और मानवतावादी लोगों के जमीर को झकझोर कर रख दिया है। इन अत्याचारों के खिलाफ दुनिया भर में उठने वाली आवाजों और जनआंदोलनों ने साबित कर दिया है कि जुल्म चाहे कितना ही ताकतवर क्यों न हो, एक दिन उसका अंत अवश्य होता है। इन चुनावी नतीजों में भी गाजा पर हो रहे अत्याचारों के खिलाफ जनता की नाराजगी का एक महत्वपूर्ण संदेश छिपा हुआ है।
अंत में मौलाना मदनी ने कहा कि दुनिया का कोई भी देश हो, जो ताकतें धर्म को सत्ता हासिल करने और उसे बनाए रखने का हथियार बनाती हैं तथा नफरत और विभाजन की राजनीति करती हैं, उन्हें इन चुनावी नतीजों से सबक लेना चाहिए। इतिहास गवाह है कि अत्याचार और दमन के सहारे चलने वाली सत्ता हमेशा कायम नहीं रहती। सरकारें आती-जाती रहती हैं, लेकिन इंसाफ, इंसानियत और सच्चाई की आवाज को हमेशा के लिए दबाया नहीं जा सकता।
