बरेली। उपद्रव के आरोप में फतेहगढ़ जेल में बंद मौलाना तौकीर रजा के छह माह पूरे हो चुके हैं, लेकिन अब तक उन्हें किसी भी मामले में पूर्ण राहत नहीं मिल सकी है। जेल से बाहर निकलने की उनकी बेचैनी का अंदाज़ इसी बात से लगाया जा सकता है कि वह पिछले छह महीनों में लोअर कोर्ट से लेकर हाईकोर्ट तक कुल 21 जमानत अर्जियां दाखिल कर चुके हैं।
हालांकि, अब भी तीन अहम मुकदमों में जमानत न मिलने के कारण उनकी रिहाई संभव नहीं हो पा रही है। नियमों के अनुसार, जब तक सभी मामलों में जमानत नहीं मिलती, तब तक आरोपित जेल से बाहर नहीं आ सकता।
लोअर कोर्ट से हाईकोर्ट तक लंबी कानूनी लड़ाई
जानकारी के अनुसार, मौलाना ने सबसे पहले अपने सभी 10 मुकदमों में सीजेएम कोर्ट में जमानत अर्जी दाखिल की, लेकिन सभी अर्जियां खारिज कर दी गईं। इसके बाद उन्होंने एडीजे कोर्ट का रुख किया, जहां से उन्हें 10 में से 7 मामलों में जमानत मिल गई।
तीन मामलों में फंसा पेंच
तीन मुकदमे ऐसे हैं जिनमें अब तक राहत नहीं मिली है—
- दो मुकदमे कोतवाली थाना से जुड़े
- एक मुकदमा बारादरी थाना से संबंधित
इन तीनों मामलों में हत्या के प्रयास (Attempt to Murder) की गंभीर धाराएं लगी हुई हैं, जिससे जमानत मिलना कठिन हो गया है।
हाईकोर्ट में भी नहीं मिली राहत
कोतवाली के मुख्य मुकदमे में एडीजे कोर्ट से जमानत खारिज होने के बाद मामला हाईकोर्ट पहुंचा, लेकिन वहां भी कई तारीखें पड़ चुकी हैं और अभी तक कोई राहत नहीं मिली है। पुलिस की ओर से मजबूत पैरवी के चलते हर सुनवाई में अगली तारीख मिल रही है।
तारीख पर तारीख…
पुलिस अधिकारियों के मुताबिक, मौलाना को पिछले छह महीनों में 30 से अधिक तारीखें मिल चुकी हैं। कुछ मामलों में तो तीन से चार बार सुनवाई टल चुकी है। फिलहाल दो मुकदमे एडीजे कोर्ट में और एक हाईकोर्ट में लंबित हैं।
जब तक सभी मामलों में जमानत नहीं मिलती, मौलाना तौकीर रजा को जेल में ही रहना होगा। लगातार मिल रही तारीखों ने उनकी कानूनी लड़ाई को लंबा और जटिल बना दिया है।

