यह साझेदारी राष्ट्रीय विकास के लिए ज्ञान-आधारित समाधान विकसित करने की हमारी साझा प्रतिबद्धता को प्रतिबिंबित करती है – प्रो जसीम मोहम्मद
नई दिल्ली/वाराणसी,। सेंटर फॉर नमो स्टडीज़ (सीएनएमएस) और अशोक इंस्टीट्यूट ऑफ टेक्नोलॉजी एंड मैनेजमेंट (एआईटीएम), वाराणसी के अंतर्गत संचालित एआईटीएम फाउंडेशन फॉर इनक्यूबेशन एंड एंटरप्रेन्योरशिप (एएफआईई) ने अनुसंधान, नवाचार, उद्यमिता, सतत विकास, भारतीय ज्ञान प्रणालियों, प्रकाशनों तथा सामुदायिक सहभागिता के क्षेत्रों में सहयोग को सुदृढ़ करने के लिए एक शैक्षणिक समझौता ज्ञापन पर हस्ताक्षर किए।
इस समझौता ज्ञापन पर शैक्षणिक उत्कृष्टता, ज्ञान-सृजन, नीतिगत अनुसंधान, क्षमता निर्माण तथा नवाचार-आधारित विकास के लिए एक सहयोगात्मक मंच के निर्माण के उद्देश्य से हस्ताक्षर किए गए। यह साझेदारी संयुक्त अनुसंधान परियोजनाओं, प्रकाशनों, सम्मेलनों, संगोष्ठियों, कार्यशालाओं, प्रशिक्षण-अवधियों, शोधवृत्ति कार्यक्रमों, उद्यमिता संबंधी पहलों तथा जनसंपर्क गतिविधियों को सुगम बनाएगी।
सेंटर फॉर नमो स्टडीज़ (सीएनएमएस) के संस्थापक एवं सभापति प्रो. जसीम मोहम्मद ने कहा, “यह साझेदारी राष्ट्रीय विकास के लिए ज्ञान-आधारित समाधान विकसित करने की हमारी साझा प्रतिबद्धता को प्रतिबिंबित करती है। इस सहयोग के माध्यम से सेन्टर फॉर नमो स्ट्डीज और एएफआईई अनुसंधान, नवाचार, उद्यमिता तथा बौद्धिक सहभागिता को प्रोत्साहित करने के लिए मिलकर कार्य करेंगे, जो ‘विकसित भारत’ के दृष्टिकोण को साकार करने में योगदान देगा। हमारा मानना है कि सार्थक शैक्षणिक और सामाजिक प्रभाव उत्पन्न करने के लिए संस्थानों का एक साथ आना आवश्यक है।”
प्रो दिव्या तंवर ने बताया कि, “यह सहयोग विद्वानों, विद्यार्थियों, नवप्रवर्तकों और नीति विशेषज्ञों के लिए अंतःविषयक अनुसंधान तथा राष्ट्र-निर्माण संबंधी पहलों से जुड़ने का एक महत्त्वपूर्ण मंच प्रदान करेगा। ऐसी साझेदारियों के माध्यम से ही विचारों को समाज के लिए उपयोगी और क्रियान्वित किए जा सकने वाले परिणामों में रूपांतरित किया जा सकता है।”
एएफआईई की ओर से एसोसिएट प्रोफेसर डॉ. अपर्णा सिंह ने इस साझेदारी का स्वागत करते हुए कहा, “एएफआईई और सेंटर फॉर नमो स्टडीज़ के साथ सहयोग स्थापित करके प्रसन्न है। यह समझौता ज्ञापन नवाचार, उद्यमिता, सतत विकास तथा अनुसंधान-आधारित पहलों को प्रोत्साहित करने के हमारे प्रयासों को और सुदृढ़ करेगा। हमारा उद्देश्य विद्यार्थियों, शोधकर्ताओं, नवोद्यमों और नवप्रवर्तकों के लिए ऐसे सार्थक अवसर उपलब्ध कराना है, जिनके माध्यम से वे भारत की विकास यात्रा में योगदान दे सकें तथा ज्ञान-आधारित विकास और नवाचार की संस्कृति को बढ़ावा दे सकें।”
इस साहिकसाहनिक समझौता ज्ञापन के अंतर्गत दोनों संस्थान संयुक्त रूप से अनुसंधान परियोजनाओं, प्रकाशनों, नीतिपत्रों, संगोष्ठियों, कार्यशालाओं, सम्मेलनों, सतत विकास संबंधी पहलों, भारतीय ज्ञान प्रणाली से संबंधित कार्यक्रमों, नवोद्यम पारितंत्र के विकास से जुड़ी गतिविधियों, क्षमता निर्माण कार्यक्रमों तथा सामुदायिक सहभागिता से संबंधित परियोजनाओं का संचालन करेंगे।

