आगरा। आगरा कैंट रेलवे स्टेशन के प्लेटफॉर्म संख्या-1 पर रविवार सुबह हीराकुंड एक्सप्रेस को रोकने के मामले में रेलवे पुलिस बल (आरपीएफ) और डिप्टी स्टेशन मास्टर (डीएसएम) के बीच विवाद इतना बढ़ गया कि मामला मारपीट तक पहुंच गया। घटना के बाद रेलवे कर्मचारियों में भारी आक्रोश फैल गया। सोशल मीडिया पर वायरल हुए वीडियो के बाद रेलवे प्रशासन ने तत्काल कार्रवाई करते हुए आरपीएफ के चार जवानों को निलंबित कर दिया और पूरे मामले की जांच के लिए तीन सदस्यीय समिति गठित की है।
रविवार सुबह करीब 11 बजे ट्रेन संख्या 20808 हीराकुंड एक्सप्रेस आगरा कैंट स्टेशन के प्लेटफॉर्म संख्या-1 पर निर्धारित ठहराव के बाद रवाना हुई। इसी दौरान ट्रेन कुछ दूरी चलने के बाद दोबारा रुक गई। आरपीएफ का आरोप है कि बी-3 कोच में चेन पुलिंग की गई थी, जिसके आधार पर एएसआई मेघराज मीणा, बालकिशन तथा आरक्षी जितेंद्र और बदन सिंह ने भुवनेश्वर निवासी आशीष कुमार और उनकी पत्नी रंजीता को पूछताछ के लिए रोक लिया।
इसी दौरान प्लेटफॉर्म पर मौजूद डिप्टी स्टेशन मास्टर नरेंद्र चाहर ने आरपीएफ की कार्रवाई का विरोध किया। उनका कहना था कि महिला यात्री रंजीता ट्रेन रुकने पर कुछ सामान लेने के लिए नीचे उतरी थीं। इसी बीच ट्रेन चल पड़ी, जिससे वह घबरा गईं और चलती ट्रेन में चढ़ने का प्रयास करने लगीं। संभावित हादसे को देखते हुए उन्होंने गार्ड से वॉकी-टॉकी पर संपर्क कर ट्रेन रुकवाने का निर्देश दिया था। डीएसएम के अनुसार ट्रेन चेन पुलिंग से नहीं, बल्कि सुरक्षा कारणों से रोकी गई थी।
दूसरी ओर आरपीएफ जवान इसे चेन पुलिंग का मामला बताते हुए दंपती को अपने साथ ले जाने पर अड़े रहे। इसी बात को लेकर डीएसएम नरेंद्र चाहर और आरपीएफ कर्मियों के बीच तीखी बहस शुरू हो गई, जो देखते ही देखते धक्का-मुक्की और मारपीट में बदल गई।
प्रत्यक्षदर्शियों के अनुसार, आरपीएफ जवानों ने डीएसएम का कॉलर पकड़ लिया और उन्हें जबरन आरपीएफ थाने की ओर ले जाने का प्रयास किया। विरोध करने पर उन्हें प्लेटफॉर्म पर घसीटते हुए ले जाया गया। इस दौरान स्टेशन पर अफरा-तफरी का माहौल बन गया। मौके पर मौजूद लोगों ने पूरी घटना का वीडियो बनाकर सोशल मीडिया पर वायरल कर दिया।
घटना की जानकारी मिलते ही बड़ी संख्या में रेलवे कर्मचारी मौके पर पहुंच गए और आरपीएफ के खिलाफ कार्रवाई की मांग करते हुए विरोध जताया। कुछ समय के लिए स्टेशन पर तनावपूर्ण स्थिति बनी रही। बाद में रेलवे अधिकारियों ने कर्मचारियों को समझाकर मामला शांत कराया।
स्टेशन प्रबंधक प्रवेंद्र प्रकाश ने बताया कि दंपती भुवनेश्वर से यात्रा कर रहे थे। महिला यात्री सामान लेने के लिए प्लेटफॉर्म पर उतरी थीं और ट्रेन चलने पर घबरा गईं। उनकी सुरक्षा को ध्यान में रखते हुए डीएसएम ने गार्ड से संपर्क कर ट्रेन रुकवाई थी। वहीं आरपीएफ का कहना है कि ट्रेन में चेन पुलिंग की गई थी और यात्रियों से पूछताछ की जा रही थी। आरपीएफ का यह भी आरोप है कि डीएसएम ने उनके साथ अभद्र भाषा का प्रयोग किया और वसूली के आरोप लगाए, जिसके बाद विवाद बढ़ गया।
मामले की गंभीरता को देखते हुए रेलवे प्रशासन ने प्रथम दृष्टया विभागीय कार्रवाई करते हुए आरपीएफ के एएसआई मेघराज मीणा, बालकिशन तथा आरक्षी जितेंद्र और बदन सिंह को तत्काल प्रभाव से निलंबित कर दिया है।
मुख्य जनसंपर्क अधिकारी डॉ. शिवम शर्मा ने बताया कि आगरा कैंट स्टेशन पर ट्रेन संख्या 20808 हीराकुंड एक्सप्रेस के ठहराव के दौरान डिप्टी स्टेशन मास्टर (ऑपरेटिंग) और आरपीएफ के बीच हुए विवाद की जांच के लिए तीन सदस्यीय जांच समिति गठित की गई है। समिति की रिपोर्ट के आधार पर आगे की विभागीय कार्रवाई की जाएगी। रेलवे प्रशासन ने स्पष्ट किया है कि पूरे मामले की निष्पक्ष जांच कर दोषी पाए जाने वालों के विरुद्ध नियमानुसार कार्रवाई की जाएगी।

