लखनऊ। उत्तर प्रदेश के औद्योगिक प्रशिक्षण संस्थानों (आईटीआई) में प्रशिक्षण की गुणवत्ता सुधारने के उद्देश्य से महानिदेशालय कौशल विकास ने बड़ा फैसला लिया है। नए निर्देशों के अनुसार जिन सरकारी और निजी आईटीआई में ट्रेडवार निर्धारित संख्या में अनुदेशक उपलब्ध नहीं होंगे या उनकी जानकारी नहीं दी जाएगी, वहां संबंधित ट्रेड में प्रवेश की अनुमति नहीं दी जाएगी। इसके चलते प्रदेश के 1,500 से अधिक निजी आईटीआई की करीब 1.5 लाख सीटें कम होने की संभावना है।
शैक्षणिक सत्र 2026-27 की प्रवेश प्रक्रिया शुरू हो चुकी है, लेकिन अनुदेशकों की भारी कमी के कारण इस बार केवल उन्हीं ट्रेडों में प्रवेश होगा, जहां 25 विद्यार्थियों पर एक अनुदेशक का निर्धारित मानक पूरा होगा। जिन ट्रेडों में शिक्षक उपलब्ध नहीं हैं, वहां प्रवेश पूरी तरह रोक दिया जाएगा।
प्रदेश के 305 राजकीय आईटीआई में 40 प्रतिशत से अधिक अनुदेशकों के पद रिक्त हैं। कई संस्थानों में दूसरे ट्रेड के अनुदेशक से कक्षाएं संचालित कराई जा रही हैं। राजधानी के राजकीय आईटीआई अलीगंज में ड्राफ्ट्समैन (मैथ) के अनुदेशक वेल्डिंग ट्रेड पढ़ा रहे हैं, जबकि मलिहाबाद आईटीआई में फैशन ट्रेड के अनुदेशक को एम्प्लॉयबिलिटी स्किल की कक्षाएं लेनी पड़ रही हैं। इससे तकनीकी शिक्षा की गुणवत्ता प्रभावित हो रही है।
महानिदेशालय के अनुसार वर्तमान में कई संस्थानों में एक अनुदेशक पर 50 से 80 विद्यार्थियों की जिम्मेदारी है, जबकि मानक 25 विद्यार्थियों पर एक शिक्षक का है। इसी कारण बड़ी संख्या में सीटों पर प्रवेश रोकना पड़ सकता है।
पिछले शैक्षणिक सत्र में प्रदेश के सरकारी आईटीआई में 1.18 लाख तथा निजी संस्थानों में 3.28 लाख सीटों पर प्रवेश हुआ था। इस बार अनुदेशकों की कमी के चलते करीब 50 प्रतिशत सीटें खाली रहने की आशंका जताई जा रही है।
उधर, नए नियमों का निजी आईटीआई संचालकों ने विरोध शुरू कर दिया है। निजी आईटीआई एसोसिएशन के मंडल अध्यक्ष राजेंद्र द्विवेदी का कहना है कि नई व्यवस्था से निजी संस्थानों पर सबसे अधिक प्रभाव पड़ेगा। उनका कहना है कि प्रवेश प्रक्रिया पहले ही देर से शुरू हुई है और अब नए नियमों के कारण दाखिले की रफ्तार और धीमी हो गई है।

