लखनऊ। उत्तर प्रदेश सरकार पंचायतों में प्रशासक बनाए गए निवर्तमान ग्राम प्रधानों और जिला पंचायत अध्यक्षों के अधिकार एवं जिम्मेदारियों को स्पष्ट करने के लिए विस्तृत दिशानिर्देश तैयार कर रही है। पंचायती राज विभाग जल्द ही यह गाइडलाइन जारी करेगा, जिसके आधार पर प्रशासक अपने कार्यों का संचालन करेंगे।
प्रस्तावित व्यवस्था के अनुसार, ग्राम पंचायतों और जिला पंचायतों द्वारा पहले से स्वीकृत विकास कार्यों को प्रशासक जिलाधिकारी की अनुमति से पूरा करा सकेंगे। वहीं, जिला पंचायतों की नई कार्ययोजना जिलाधिकारी के माध्यम से शासन को भेजी जाएगी, जबकि ग्राम पंचायतों की कार्ययोजना का अनुमोदन जिलाधिकारी स्तर पर किया जाएगा।
दरअसल, पहली बार निवर्तमान ग्राम प्रधानों और जिला पंचायत अध्यक्षों को प्रशासक बनाए जाने के बाद कई प्रशासकों ने अपने अधिकारों और कार्यक्षेत्र को लेकर जिला पंचायत राज अधिकारियों और अपर मुख्य अधिकारियों से जानकारी मांगी थी। स्पष्ट दिशा-निर्देश न होने की जानकारी शासन तक पहुंचने के बाद अब पंचायती राज विभाग कार्यों की विस्तृत सूची तैयार कर रहा है।
सूत्रों के अनुसार, ग्राम पंचायतों के नीतिगत निर्णय जिलाधिकारी के स्तर पर लिए जाएंगे, जबकि जिला पंचायतों से जुड़े नीतिगत मामलों को जिलाधिकारी के माध्यम से शासन को भेजा जाएगा और अंतिम निर्णय शासन स्तर पर होगा। इसके अलावा प्रशासक कर्मचारियों के वेतन, पहले से स्वीकृत एवं नए विकास कार्यों के भुगतान सहित अन्य नियमित प्रशासनिक कार्य भी कर सकेंगे।
गौरतलब है कि अब तक पंचायतों का कार्यकाल समाप्त होने पर संबंधित जिले के अधिकारियों को प्रशासक बनाया जाता था, लेकिन इस बार पहली बार निवर्तमान ग्राम प्रधानों और जिला पंचायत अध्यक्षों को यह जिम्मेदारी सौंपी गई है।
इधर, प्रदेश के 826 ब्लॉक प्रमुखों का कार्यकाल रविवार को समाप्त हो रहा है। सूत्रों के मुताबिक, सरकार शनिवार को उन्हें भी प्रशासक नियुक्त करने का आदेश जारी कर सकती है।

