लखनऊ। उत्तर प्रदेश सरकार ने परिषदीय विद्यालयों में संचालित निपुण भारत मिशन का दायरा बढ़ाते हुए अब इसे बाल वाटिका से कक्षा पांच तक लागू करने का निर्णय लिया है। पहले यह मिशन केवल बाल वाटिका से कक्षा दो तक सीमित था, लेकिन अब कक्षा तीन से पांच के विद्यार्थियों के लिए भी विषयवार और कक्षावार स्पष्ट अधिगम (लर्निंग) लक्ष्य निर्धारित किए गए हैं।
इस संबंध में बेसिक शिक्षा विभाग के अपर मुख्य सचिव पार्थ सारथी सेन शर्मा ने शुक्रवार को सभी मंडलायुक्तों और जिलाधिकारियों को निर्देश जारी करते हुए मिशन के विस्तारीकरण और उसके प्रभावी क्रियान्वयन के निर्देश दिए।
नई व्यवस्था के तहत कक्षा दो तक विकसित की गई भाषा और गणित की आधारभूत दक्षताओं को और मजबूत किया जाएगा। वहीं, कक्षा तीन से पांच के विद्यार्थियों के लिए हिंदी, गणित, अंग्रेजी और पर्यावरण अध्ययन के स्पष्ट अधिगम लक्ष्य तय किए गए हैं। इन्हीं लक्ष्यों के अनुरूप शिक्षण कराया जाएगा और बच्चों की प्रगति की नियमित निगरानी भी की जाएगी।
राज्य शैक्षिक अनुसंधान एवं प्रशिक्षण परिषद (एससीईआरटी) कक्षा एक से पांच तक उपलब्ध ई-कंटेंट का निपुण भारत मिशन के लक्ष्यों के अनुरूप मिलान करेगी तथा आवश्यकता पड़ने पर उसमें संशोधन भी करेगी।
विद्यालयों में रीडिंग कॉर्नर को अधिक सक्रिय बनाया जाएगा, ताकि बच्चों में पुस्तक पढ़ने की आदत विकसित हो सके। मिशन की निगरानी के लिए राज्य स्तर से लेकर ब्लॉक स्तर तक समितियां गठित की जाएंगी।
बच्चों की पढ़ाई में अभिभावकों की भागीदारी बढ़ाने के लिए अभिभावक-शिक्षक बैठक (पीटीएम), फोन कॉल, गृह भ्रमण और शिक्षा चौपाल जैसे माध्यमों का उपयोग किया जाएगा। इससे अभिभावकों को बच्चों की शैक्षणिक प्रगति की नियमित जानकारी मिलेगी और वे उनकी पढ़ाई में बेहतर सहयोग कर सकेंगे।
सरकार का मानना है कि इस पहल से बच्चों की पढ़ने, लिखने और गणितीय क्षमता अधिक मजबूत होगी तथा कक्षा के अनुसार तय किए गए स्पष्ट सीखने के लक्ष्य शिक्षा को अधिक व्यवस्थित और प्रभावी बनाएंगे।

