नई दिल्ली। पहाड़ों पर बर्फबारी और खराब मौसम के कारण जनगणना का काम प्रभावित न हो, इसके लिए केंद्र सरकार ने खास तैयारी की है। लद्दाख, जम्मू-कश्मीर के बर्फीले इलाकों, हिमाचल प्रदेश और उत्तराखंड के पहाड़ी क्षेत्रों के लिए जनगणना 2027 की अलग समय-सारणी जारी की गई है।
सबसे खास बात यह है कि इन क्षेत्रों के लोग 17 अगस्त से 31 अगस्त 2026 तक घर बैठे ऑनलाइन ‘सेल्फ एन्युमेरेशन’ के जरिए अपने परिवार की जानकारी खुद दर्ज कर सकेंगे।
इसके बाद 1 सितंबर से 30 सितंबर तक सरकारी कर्मचारी घर-घर पहुंचकर जनसंख्या गणना करेंगे। दर्ज की गई जानकारी का सत्यापन 1 से 5 अक्टूबर के बीच किया जाएगा। इन क्षेत्रों के लिए 1 अक्टूबर 2026 को रेफरेंस डेट माना जाएगा।
क्या-क्या पूछा जाएगा?
जनगणना के दौरान नाम, उम्र, लिंग, वैवाहिक स्थिति, धर्म, भाषा, शिक्षा, SC/ST स्थिति और रोजगार जैसी महत्वपूर्ण जानकारियां दर्ज की जाएंगी।
पहाड़ों के लिए क्यों बदली व्यवस्था?
बर्फबारी और खराब मौसम के कारण कई पहाड़ी इलाकों में लंबे समय तक आवागमन मुश्किल हो जाता है। ऐसे में सरकार ने पहले ही ऑनलाइन जानकारी दर्ज कराने का विकल्प देकर जनगणना प्रक्रिया को आसान बनाने की कोशिश की है।
यानी इस बार पहाड़ों में बर्फबारी जनगणना की राह नहीं रोक पाएगी—पहले ऑनलाइन गिनती, फिर घर-घर सत्यापन।

