बदलती जीवनशैली में दिल की सेहत को लेकर जागरूक होना बेहद ज़रूरी — डॉ. तसलीम अब्बास
आज की तेज रफ्तार जिंदगी में इंसान अपने काम, जिम्मेदारियों और भागदौड़ में इतना व्यस्त है कि अक्सर अपने दिल की सेहत को नजरअंदाज कर देता है। जबकि हृदय हमारे शरीर का वह महत्वपूर्ण अंग है, जो हर पल बिना रुके काम करता रहता है। इसी महत्व को समझाने और लोगों को हृदय रोगों के प्रति जागरूक करने के लिए हर वर्ष 29 सितंबर को विश्व हृदय दिवस (World Heart Day) मनाया जाता है।
डॉ. तसलीम अब्बास कहते हैं कि हृदय रोग अब केवल बुजुर्गों की समस्या नहीं रह गए हैं। कम उम्र में भी हाई ब्लड प्रेशर, मधुमेह, मोटापा, तनाव, धूम्रपान, गलत खान-पान और शारीरिक गतिविधियों की कमी हृदय को नुकसान पहुंचा सकती है।
दिल की बीमारी से बचाव हमारे हाथ में है
डॉ. तसलीम अब्बास के अनुसार हृदय को स्वस्थ रखने के लिए जीवनशैली में छोटे-छोटे बदलाव बेहद प्रभावी साबित हो सकते हैं। नियमित पैदल चलना या व्यायाम करना, संतुलित भोजन लेना, नमक और अत्यधिक तैलीय खाद्य पदार्थों का सेवन कम करना तथा धूम्रपान और तंबाकू से पूरी तरह दूरी बनाना जरूरी है।
उन्होंने कहा कि ब्लड प्रेशर, ब्लड शुगर और कोलेस्ट्रॉल की नियमित जांच कराना भी महत्वपूर्ण है। यदि परिवार में हृदय रोग का इतिहास रहा है तो व्यक्ति को अपनी सेहत को लेकर और अधिक सतर्क रहना चाहिए।
तनाव भी बन सकता है दिल का दुश्मन
आज के दौर में मानसिक तनाव तेजी से बढ़ रहा है। लंबे समय तक तनाव, पर्याप्त नींद न लेना और लगातार चिंता करना भी स्वास्थ्य पर नकारात्मक प्रभाव डाल सकता है। इसलिए काम के साथ आराम, पर्याप्त नींद और मानसिक सुकून के लिए समय निकालना भी जरूरी है।
इन लक्षणों को नजरअंदाज न करें
डॉ. तसलीम अब्बास बताते हैं कि सीने में दबाव या दर्द, सांस फूलना, अचानक अत्यधिक पसीना आना, चक्कर, कमजोरी या दर्द का हाथ, कंधे, पीठ अथवा जबड़े तक पहुंचना हृदय संबंधी गंभीर समस्या का संकेत हो सकता है। ऐसे लक्षण दिखाई देने पर समय बर्बाद किए बिना तत्काल चिकित्सकीय सहायता लेनी चाहिए।
दिल की हिफाजत, परिवार की हिफाजत
विश्व हृदय दिवस केवल एक दिन जागरूकता फैलाने का अवसर नहीं, बल्कि अपनी रोजमर्रा की आदतों पर विचार करने का संदेश है। स्वस्थ दिल का मतलब सिर्फ लंबी जिंदगी नहीं, बल्कि बेहतर और सक्रिय जिंदगी भी है।
डॉ. तसलीम अब्बास का संदेश है—“अपने दिल की आवाज को सुनिए, अपनी सेहत को समय दीजिए और बीमारी का इंतजार करने के बजाय बचाव को अपनी आदत बनाइए।”
आज से एक संकल्प लें—अपने दिल के लिए रोज थोड़ा समय जरूर निकालेंगे।
लेखक – डॉ तसलीम अब्बास
होम्योपैथिक चिकित्सक
