सपा-भाजपा के बाद ASP को बड़ी कामयाबी मिलने का दावा, युवाओं में बढ़ते क्रेज और बसपा की खाली होती राजनीतिक जगह को बताया वजह
लखनऊ। उत्तर प्रदेश विधानसभा चुनाव 2027 को लेकर सियासी सरगर्मियां तेज होती जा रही हैं। चुनाव में अभी करीब छह महीने का समय बाकी है, लेकिन संभावित चुनावी समीकरणों को लेकर सामने आ रहे सर्वे और राजनीतिक आकलनों ने चर्चाओं को और हवा दे दी है।
इसी बीच एक सर्वे एजेंसी की रिपोर्ट ने उत्तर प्रदेश की राजनीति में नई बहस छेड़ दी है। रिपोर्ट में दावा किया गया है कि आगामी विधानसभा चुनाव में चंद्रशेखर आजाद के नेतृत्व वाली आजाद समाज पार्टी (कांशीराम) प्रदेश की राजनीति में एक बड़ी ताकत के रूप में उभर सकती है।
सर्वे के मुताबिक, यदि मौजूदा राजनीतिक तस्वीर में भाजपा और समाजवादी पार्टी के बाद किसी दल के बेहतर प्रदर्शन की संभावना है तो उसमें आजाद समाज पार्टी (कांशीराम) का नाम प्रमुखता से सामने आ रहा है। हालांकि, यह सर्वे का अनुमान है और चुनावी नतीजे इससे अलग हो सकते हैं।
युवाओं में बढ़ती लोकप्रियता को माना जा रहा अहम कारण
सर्वे रिपोर्ट में आजाद समाज पार्टी के संभावित उभार के पीछे युवाओं के बीच पार्टी और चंद्रशेखर आजाद की बढ़ती लोकप्रियता को प्रमुख वजह बताया गया है। इसके अलावा रिपोर्ट में बहुजन समाज पार्टी (बसपा) की कमजोर होती चुनावी स्थिति से पैदा हुई राजनीतिक जगह को भी ASP के लिए संभावित अवसर के तौर पर देखा गया है।
राजनीतिक विश्लेषण के मुताबिक, यदि आजाद समाज पार्टी युवाओं और बहुजन समाज के विभिन्न वर्गों के बीच अपनी पकड़ मजबूत करने में सफल रहती है, तो 2027 का चुनावी मुकाबला कई सीटों पर त्रिकोणीय हो सकता है।
हालांकि, चुनाव में अभी समय बाकी है और राजनीतिक दलों की रणनीति, गठबंधन, उम्मीदवारों के चयन तथा जमीनी समीकरणों में आने वाले बदलाव चुनावी तस्वीर को पूरी तरह बदल सकते हैं। ऐसे में सर्वे के इन दावों को फिलहाल संभावित राजनीतिक संकेत के तौर पर ही देखा जा रहा है।
नोट: इस रिपोर्ट में बताए गए आंकड़े और राजनीतिक संभावनाएं संबंधित सर्वे एजेंसी के दावों पर आधारित हैं। स्वतंत्र रूप से इन दावों की पुष्टि नहीं हुई है।
