आगरा। अपनी पहली पुस्तक ‘मृत्युंजय’ की सफलता के बाद जीडी गोयनका पब्लिक स्कूल के प्रधानाचार्य एवं लेखक पुनीत वशिष्ठ अब अपनी दूसरी पुस्तक ‘टीन इन द कैंटीन’ लेकर पाठकों के बीच आए हैं। खास बात यह है कि यह उनकी पहली द्विभाषी पुस्तक है, जो हिंदी और अंग्रेजी दोनों भाषाओं में लिखी गई है।
किशोरावस्था जीवन का वह दौर है, जब सोच, भावनाएं, सपने और चुनौतियां तेजी से बदलती हैं। इसी संवेदनशील उम्र को केंद्र में रखते हुए पुनीत वशिष्ठ ने ‘टीन इन द कैंटीन’ की रचना की है। पुस्तक में किशोरों की रोजमर्रा की दुनिया, उनकी सोच, दोस्ती, भावनात्मक उतार-चढ़ाव और जीवन से जुड़े अनुभवों को सहज और रोचक अंदाज में सामने लाने का प्रयास किया गया है।
लेखक के रूप में पुनीत वशिष्ठ की यह दूसरी पारी उनकी रचनात्मक यात्रा को एक नया विस्तार देती है। शिक्षा के क्षेत्र में लंबे समय से सक्रिय होने के कारण उन्हें किशोर मन और उनकी बदलती मनोदशाओं को करीब से समझने का अवसर मिलता रहा है। यही अनुभव उनकी नई पुस्तक की विषयवस्तु में भी दिखाई देता है।
‘टीन इन द कैंटीन’ की द्विभाषी प्रस्तुति इसे और खास बनाती है। हिंदी और अंग्रेजी दोनों भाषाओं में होने के कारण यह पुस्तक अलग-अलग भाषाई पृष्ठभूमि वाले किशोर पाठकों तक आसानी से पहुंच बनाने का प्रयास करती है।
‘मृत्युंजय’ के बाद पुनीत वशिष्ठ की इस नई कृति को लेकर साहित्य और शिक्षा जगत में उत्सुकता है। पुस्तक के माध्यम से उन्होंने किशोरों को केवल पढ़ने के लिए सामग्री देने के बजाय उनकी अपनी दुनिया, भावनाओं और सवालों से संवाद स्थापित करने की कोशिश की है।
पुनीत वशिष्ठ की नई पुस्तक ‘टीन इन द कैंटीन’ किशोर मन की दुनिया को समझने और उसे साहित्य के माध्यम से अभिव्यक्त करने की एक सार्थक पहल के रूप में सामने आई है।
