नई दिल्ली। भगवान श्रीकृष्ण से जुड़ी अनेक कथाएं बचपन से ही हम सुनते और पढ़ते आए हैं। उनके बाल स्वरूप की लीलाओं से लेकर मथुरा में कंस वध, महाभारत के रणक्षेत्र में अर्जुन को दिए गए गीता के उपदेश और द्वारिकाधीश के रूप में उनकी भूमिका तक, श्रीकृष्ण का जीवन भारतीय संस्कृति और आस्था में विशेष स्थान रखता है।
लेकिन कृष्ण भक्तों के मन में एक सवाल अक्सर उठता है—जब भगवान श्रीकृष्ण ने देह त्याग किया, तब उनके पार्थिव शरीर का क्या हुआ?
इसका उल्लेख महाभारत के मौसल पर्व में मिलता है। मौसल पर्व में यादव वंश के अंत और भगवान श्रीकृष्ण के देह त्याग से जुड़ी घटनाओं का वर्णन किया गया है।
गांधारी के श्राप के बाद यादव वंश का अंत
महाभारत युद्ध समाप्त होने के बाद भगवान श्रीकृष्ण जब माता गांधारी से मिलने पहुंचे, तब उन्होंने अपने सौ पुत्रों की मृत्यु का असहनीय दुख देखा। पुत्रों के विनाश से व्यथित गांधारी ने भगवान श्रीकृष्ण को श्राप दिया कि जिस प्रकार कौरव वंश का नाश हुआ, उसी प्रकार यादव वंश का भी अंत होगा।
पौराणिक मान्यता के अनुसार, समय बीतने के साथ गांधारी का श्राप फलित हुआ और यादव वंश का विनाश हो गया। इसके बाद भगवान श्रीकृष्ण ने भी पृथ्वी पर अपनी लीला समाप्त करने का निर्णय लिया।
वन में हुआ श्रीकृष्ण का देह त्याग
महाभारत के वर्णन के अनुसार, भगवान श्रीकृष्ण एक दिन वन में एक वृक्ष के नीचे विश्राम कर रहे थे। उसी समय जरा नामक एक शिकारी ने दूर से उनके पैर को हिरण समझकर बाण चला दिया। जब शिकारी को अपनी भूल का पता चला तो वह अत्यंत दुखी हुआ।
श्रीकृष्ण ने उसे सांत्वना दी और बताया कि यह घटना भी उनकी लीला का ही एक हिस्सा है। इसके बाद उन्होंने अपना देह त्याग दिया।
क्या हुआ श्रीकृष्ण के पार्थिव शरीर का?
महाभारत के अनुसार, भगवान श्रीकृष्ण के देह त्याग के बाद उनके पार्थिव शरीर का विधि-विधान से अंतिम संस्कार किया गया। हालांकि, श्रीकृष्ण के शरीर और उनके अंतिम संस्कार से जुड़ी कई बातें विभिन्न पुराणों और लोक परंपराओं में अलग-अलग रूप में मिलती हैं।
इसी कारण श्रीकृष्ण के देह त्याग और उनके पार्थिव शरीर को लेकर कई धार्मिक कथाएं और मान्यताएं प्रचलित हैं।
भगवान श्रीकृष्ण का जीवन केवल एक धार्मिक कथा नहीं, बल्कि भारतीय दर्शन, अध्यात्म और संस्कृति का महत्वपूर्ण आधार माना जाता है। उनके जीवन का अंतिम अध्याय भी भक्तों के लिए उतना ही रहस्यमय और श्रद्धा से जुड़ा हुआ है, जितनी उनकी बाल लीलाएं और गीता का संदेश।
