राष्ट्रीय पोषण सप्ताह पर भागलपुर में राष्ट्रीय संगोष्ठी, विशेषज्ञों ने संतुलित और विविधतापूर्ण आहार को बताया स्वस्थ जीवन की कुंजी
भागलपुर। राष्ट्रीय पोषण सप्ताह के अवसर पर भारतीय पोषण संघ, भागलपुर चैप्टर, स्नातकोत्तर गृह विज्ञान—आहार एवं पोषण तथा सफाली संस्थान के संयुक्त तत्वावधान में “पोषण की शक्ति को पहचानें” विषय पर पोषण जागरूकता कार्यक्रम एवं राष्ट्रीय संगोष्ठी का आयोजन हाइब्रिड मोड में किया गया।

कार्यक्रम का उद्देश्य लोगों को पोषण के प्रति जागरूक करने के साथ यह संदेश देना रहा कि स्वस्थ जीवन की शुरुआत हमारी थाली से होती है। विशेषज्ञों ने कहा कि पोषण केवल भोजन की मात्रा का नाम नहीं है, बल्कि भोजन की गुणवत्ता, विविधता और संतुलन भी उतना ही महत्वपूर्ण है।
कार्यक्रम का शुभारंभ गृह विज्ञान विभाग की विभागाध्यक्ष डॉ. शेफाली के स्वागत भाषण से हुआ। इसके बाद सफाली बाल मंडली की काजल कुमारी एवं रूपा कुमारी ने स्वागत गीत प्रस्तुत किया।
संगोष्ठी का उद्घाटन प्रो. डॉ. ए.के. राय, पूर्व कुलपति बी.एन.एम.यू., मधेपुरा एवं भागलपुर विश्वविद्यालय, भागलपुर ने किया। उन्होंने पोषण को व्यक्ति, परिवार और राष्ट्र के स्वास्थ्य से जोड़ते हुए समाज में व्यापक पोषण जागरूकता की आवश्यकता पर बल दिया।
कार्यक्रम की अध्यक्षता प्रो. डॉ. फारूक अली, पूर्व कुलपति, जे.पी. विश्वविद्यालय, छपरा ने की। अपने अध्यक्षीय संबोधन में उन्होंने कहा, “पेट भरना पर्याप्त नहीं है, हमें पोषण चाहिए।” उन्होंने लोगों से अपनी थाली में विभिन्न खाद्य समूहों को शामिल करने तथा संतुलित एवं विविधतापूर्ण भोजन अपनाने की अपील की।
प्रो. डॉ. फारूक अली ने खाद्य नीति और पोषण के महत्व पर चर्चा करते हुए संदेश दिया—“थाली से कुर्सी तक… तुम खुद बदलो, जमाना बदल जाएगा।” उन्होंने कहा कि स्वस्थ नागरिक ही स्वस्थ समाज और मजबूत राष्ट्र के निर्माण में महत्वपूर्ण भूमिका निभा सकते हैं।
इस अवसर पर सभी अतिथियों को अंगवस्त्र एवं फ्रूट बास्केट भेंट कर सम्मानित किया गया।
कुपोषण के कारणों पर हुई चर्चा
शोध सत्र में प्रो. डॉ. सरफराज अहमद, पूर्व विभागाध्यक्ष, वनस्पति विज्ञान विभाग, जे.पी. विश्वविद्यालय, छपरा ने क्वाशिओरकर और मैरास्मस जैसे कुपोषण संबंधी रोगों पर विस्तार से प्रकाश डाला। उन्होंने इनके कारणों, लक्षणों तथा सूक्ष्म एवं स्थूल पोषक तत्वों की भूमिका को सरल तरीके से समझाया।
वहीं डॉ. शाहिद रज़ा जमाल, विभागाध्यक्ष, उर्दू विभाग, मुंगेर विश्वविद्यालय ने पोषण में निवेश के महत्व पर विचार रखते हुए कहा कि पोषण पर किया गया निवेश वास्तव में आने वाली पीढ़ियों के स्वास्थ्य और मानव संसाधन के विकास में निवेश है।
तकनीकी सत्र की अध्यक्षता डॉ. शाहिद रज़ा जमाल ने की, जबकि डॉ. के.सी. मिश्रा सह-अध्यक्ष रहे और गुलअफशां परवीन ने प्रतिवेदक की भूमिका निभाई।
विभिन्न विश्वविद्यालयों के शोधार्थियों ने लिया हिस्सा
संगोष्ठी में जे.पी. विश्वविद्यालय छपरा, बी.एन.एम.यू. मधेपुरा, पूर्णिया विश्वविद्यालय पूर्णिया, एन.पी.यू. झारखंड, शिवहर तथा टी.एम. भागलपुर विश्वविद्यालय भागलपुर से आए शोधार्थियों एवं प्रतिभागियों ने सक्रिय सहभागिता की।
कार्यक्रम में पोषण से संबंधित कुल 15 शोध-पत्र प्रस्तुत किए गए। इनमें पोषण, स्वास्थ्य, आहार और जन-जागरूकता से जुड़े विभिन्न महत्वपूर्ण विषयों पर चर्चा की गई।
विशेषज्ञों ने कहा कि कुपोषण केवल भूख की समस्या नहीं है, बल्कि यह भोजन की गुणवत्ता, आर्थिक स्थिति, जागरूकता, जीवनशैली और सही खाद्य विकल्पों से भी जुड़ा विषय है। समाज के प्रत्येक वर्ग तक संतुलित, विविधतापूर्ण, सुरक्षित एवं पोषक भोजन की जानकारी पहुंचाना समय की आवश्यकता है।
कार्यक्रम में डॉ. रंजना कुमारी सिंह, चंद्रलोक भारती, मो. तसनीम कौसर, मलिका, रिजवाना, रुखसाना आज़मी, डॉ. ज्योति बाला, बिजया लक्ष्मी, गुलअफशा परवीन, छोटू कुमार चंदन, शिल्पा कुमारी एवं पूजा कुमारी सहित अन्य प्रतिभागियों ने अपने शोध आलेख प्रस्तुत किए।
