होटल जेपी पैलेस में 23वें ARCASIA फोरम का पांच दिवसीय आगाज, 24 एशियाई देशों के 600 से अधिक प्रतिनिधि ले रहे हिस्सा
आगरा। ताज नगरी आगरा में मंगलवार से वास्तुकला के क्षेत्र का एक बड़ा अंतरराष्ट्रीय आयोजन शुरू हो गया। फतेहाबाद रोड स्थित होटल जेपी पैलेस में द इंडियन इंस्टीट्यूट ऑफ आर्किटेक्ट्स (IIA) के तत्वावधान में पांच दिवसीय 23वें ARCASIA फोरम का शुभारंभ हुआ। आयोजन में एशिया के 24 देशों से 600 से अधिक अंतरराष्ट्रीय प्रतिनिधि, भारतीय आर्किटेक्ट, शिक्षाविद, विद्यार्थी और विशेषज्ञ भाग ले रहे हैं।
फोरम का मुख्य विषय “Bringing Back Vernacular Wisdom” यानी पारंपरिक वास्तु ज्ञान को फिर से आधुनिक वास्तुकला में शामिल करना है। आयोजन के तहत आगरा में ARCASIA की विभिन्न कमेटी और काउंसिल बैठकें आयोजित की जा रही हैं, जबकि 11-12 सितंबर को जयपुर में होने वाले ओपन फोरम में भारत और विदेशों से करीब ढाई हजार आर्किटेक्ट शामिल होंगे।
फोरम के संयोजक और जयपुर के आर्किटेक्ट तुषार सोगानी ने पत्रकारों से बातचीत में कहा कि यह आयोजन भारत की वास्तुकला विरासत और पारंपरिक ज्ञान को दुनिया के सामने प्रस्तुत करने का महत्वपूर्ण अवसर है। उन्होंने कहा कि आज आवश्यकता है कि भारत के पुरातात्विक ज्ञान, ऐतिहासिक वास्तुकला और विशिष्ट निर्माण परंपराओं को आधुनिक डिजाइन और भवन निर्माण में शामिल किया जाए।
उन्होंने कहा कि भारत की Vernacular Wisdom में मजबूती, टिकाऊपन और स्थानीय परिस्थितियों के अनुरूप निर्माण की गहरी समझ मौजूद है। दुनिया को यह जानना चाहिए कि वास्तुकला के क्षेत्र में भारत की परंपराएं आज भी आधुनिक चुनौतियों का समाधान देने में सक्षम हैं।
विरासत से सीखने का सुनहरा अवसर : बू जियांग
ARCASIA के अध्यक्ष बू जियांग (चीन) ने कहा कि विज्ञान और तकनीक ने काफी प्रगति की है तथा भवन निर्माण के क्षेत्र में नई तकनीकें सामने आई हैं। इसके बावजूद हमारी विरासत से सीखने की जरूरत बनी हुई है।
उन्होंने कहा कि विरासत में मौजूद ज्ञान और अनुभव से आधुनिक भवन निर्माण की चुनौतियों का बेहतर समाधान निकाला जा सकता है। यह फोरम एशियाई आर्किटेक्ट्स के लिए तकनीकी और वैचारिक साझेदारी तथा भारत की समृद्ध वास्तुकला विरासत से सीखने का सुनहरा अवसर है।
ताजमहल की वास्तुकला से विदेशी विशेषज्ञ हुए प्रभावित
IIA के राष्ट्रीय अध्यक्ष आर्किटेक्ट विलास वसंत अवचट (मुंबई) ने कहा कि फोरम के पहले दिन विभिन्न देशों से आए आर्किटेक्ट्स ने विश्व धरोहर स्मारक ताजमहल का भ्रमण किया और उसकी वास्तुकला से बेहद प्रभावित हुए।
उन्होंने कहा कि यह आयोजन दुनिया को भारतीय प्राचीन वास्तु विरासत को आधुनिक संदर्भ में ढालने की कला को समझने का अवसर प्रदान करेगा। उन्होंने बताया कि इंडियन इंस्टीट्यूट ऑफ आर्किटेक्ट्स पेशेवर और शैक्षिक साझेदारी के लिए एक वैश्विक मंच है, जिससे भारत के करीब 35 हजार आर्किटेक्ट जुड़े हुए हैं।
400-500 साल पुरानी इमारतों से सीखने की जरूरत : समीर गुप्ता
IIA आगरा सेंटर के अध्यक्ष आर्किटेक्ट समीर गुप्ता विभव ने कहा कि “Bringing Back Vernacular Wisdom” जैसे विषय पर वैचारिक साझेदारी के लिए आगरा से बेहतर स्थान नहीं हो सकता। आगरा में ताजमहल, आगरा किला और फतेहपुर सीकरी जैसे तीन यूनेस्को विश्व धरोहर स्थल मौजूद हैं।
उन्होंने कहा कि इन ऐतिहासिक इमारतों की वास्तुकला बेहद मजबूत है और इनके निर्माण में जलवायु का भी विशेष ध्यान रखा गया था। आज की कई इमारतें महज दो-तीन साल में सीलन और लीकेज जैसी समस्याओं से जूझने लगती हैं, जबकि 400-500 वर्ष पुरानी विश्व धरोहर इमारतों में आज भी मजबूती और टिकाऊपन देखने को मिलता है।
उन्होंने कहा कि इन विरासत स्थलों से आधुनिक वास्तुकारों को बहुत कुछ सीखने की आवश्यकता है। उम्मीद है कि इस फोरम के माध्यम से भारत और विदेशों के हजारों आर्किटेक्ट भारतीय वास्तु परंपरा और विरासत को आधुनिक वास्तुकला में उपयोग करने के नए तरीके सीखेंगे।
पांच हॉल में दिनभर चलीं बैठकें
फोरम के पहले दिन होटल जेपी पैलेस के पांच अलग-अलग हॉल में सुबह से शाम तक ऑनलाइन और ऑफलाइन बैठकें आयोजित की गईं। इनमें यंग आर्किटेक्ट्स, सस्टेनेबल आर्किटेक्चर, आर्किटेक्चरल एजुकेशन, सोशल रिस्पॉन्सिबिलिटी और प्रोफेशनल प्रैक्टिस से जुड़ी ARCASIA कमेटियों की बैठकें प्रमुख रहीं।
इस दौरान IIA उत्तर प्रदेश चैप्टर के चेयरमैन आर्किटेक्ट संदीप सरस्वत (लखनऊ) भी प्रमुख रूप से मौजूद रहे।
परंपरा और आधुनिकता के बीच संवाद
फोरम में क्लाइमेट रिस्पॉन्सिव डिजाइन, प्राकृतिक निर्माण सामग्री, पारंपरिक शिल्प एवं निर्माण तकनीक, पारंपरिक भवन स्वरूपों की नई व्याख्या, वर्नाक्युलर आर्किटेक्चर से सीख, संस्कृति एवं स्थान, शहरी डिजाइन में पहचान और डिजाइन शिक्षा जैसे विषयों पर चर्चा होगी।
ARCASIA फोरम का उद्देश्य टिकाऊ वास्तुकला को बढ़ावा देना, एशियाई आर्किटेक्ट्स के बीच ज्ञान एवं अनुभव का आदान-प्रदान बढ़ाना, नई वास्तु तकनीकों को अपनाने के अवसर उपलब्ध कराना तथा अंतरराष्ट्रीय सहयोग को मजबूत करना है। इसके साथ ही एशिया की विविध वास्तु परंपराओं के संरक्षण और उन्हें आधुनिक संदर्भ में विकसित करने पर भी जोर दिया जाएगा।
पritzker विजेता राइकेन यामामोतो होंगे प्रमुख वक्ताओं में
फोरम का एक प्रमुख आकर्षण जापान के प्रसिद्ध आर्किटेक्ट और 2024 Pritzker Architecture Prize विजेता राइकेन यामामोतो का Keynote Session होगा। उनका सत्र “Vernacular as a System, Not a Style” विषय पर केंद्रित रहेगा।
इसके अलावा भारत सहित एशिया के विभिन्न देशों के वास्तुकला और डिजाइन विशेषज्ञ तकनीकी तथा मास्टर सेशन में हिस्सा लेंगे।
ओपन फोरम में इन विषयों पर होगी चर्चा
- Mud, Stone, Bamboo, Lime: The New Material Intelligence
- Hands That Build: Craft as Structure, Detail, and Identity
- Courtyard to Community: Old Typologies for New Life
- Heat, Wind, Shade: Designing Buildings That Breathe
- Teaching the Ground: Making Design Education More Real
- Streets with Soul: Urban Identity Beyond Facades
आगरा से जयपुर तक वास्तुकला का अंतरराष्ट्रीय संवाद
पांच दिवसीय यह आयोजन गोल्डन ट्राएंगल आगरा-जयपुर-दिल्ली में भारतीय वास्तुकला की समृद्ध परंपरा, विरासत और आधुनिक तकनीक के बीच संवाद स्थापित करने की दिशा में महत्वपूर्ण पहल माना जा रहा है।
