हल्द्वानी। नोएडा का चर्चित निठारी कांड एक बार फिर सुर्खियों में है। 29 दिसंबर 2006 को सामने आए इस मामले ने पूरे देश को झकझोर दिया था। नोएडा के निठारी गांव में मोनिंदर सिंह पंधेर के घर के पीछे स्थित नाले से बच्चों के कंकाल बरामद हुए थे। शुरुआती तौर पर आठ बच्चों के कंकाल मिलने की बात सामने आई थी, बाद में मृतकों की संख्या 19 तक पहुंची।
मामले की जांच केंद्रीय जांच ब्यूरो (सीबीआई) को सौंपी गई थी। जांच के दौरान मोनिंदर सिंह पंधेर और उसके घरेलू सहायक सुरेंद्र कोली को गिरफ्तार किया गया। मामले में कई अलग-अलग मुकदमे दर्ज हुए और लंबे समय तक अदालतों में सुनवाई चली।
हालांकि, बाद में न्यायिक प्रक्रिया में पंधेर और कोली को विभिन्न मामलों में राहत मिली और अंततः दोनों को सुप्रीम कोर्ट से बरी कर दिया गया। इस घटनाक्रम के बाद निठारी कांड को लेकर सबसे बड़ा सवाल यही बना रहा कि आखिर उन बच्चों की मौत के लिए जिम्मेदार कौन था।
समय बीतने के साथ निठारी कांड की चर्चा सार्वजनिक जीवन में कम होती गई, लेकिन हरिद्वार में सुरेंद्र कोली की आत्महत्या की खबर के बाद यह मामला एक बार फिर चर्चा में आ गया है। इसके साथ ही 19 बच्चों की मौत की जिम्मेदारी और उस समय हुई जांच को लेकर पुराने सवाल भी फिर सामने आ रहे हैं।
निठारी कांड अकेला ऐसा मामला नहीं है, जिसमें जांच और न्यायिक प्रक्रिया के बावजूद घटनाओं को लेकर कई सवाल सार्वजनिक चर्चा में बने रहे। नोएडा का आरुषि-हेमराज हत्याकांड भी देश के चर्चित मामलों में शामिल रहा है, जिसमें जांच और अदालतों की लंबी प्रक्रिया के बावजूद घटना को लेकर अलग-अलग सवाल और बहस जारी रही।
निठारी कांड आज भी यह सवाल छोड़ता है कि 19 बच्चों की मौत की पूरी सच्चाई आखिर क्या थी और क्या वह कभी पूरी तरह सामने आ पाएगी?
