कोर्ट ने दवाओं की कीमतों में भारी अंतर और निजी अस्पतालों की फार्मेसी व्यवस्था पर जताई कड़ी चिंता
नई दिल्ली। कैंसर जैसी गंभीर बीमारी के इलाज में इस्तेमाल होने वाली दवाओं की कीमतों में भारी अंतर को लेकर सुप्रीम कोर्ट ने केंद्र सरकार से कड़े सवाल किए हैं। सुनवाई के दौरान अदालत के सामने एक ऐसी कैंसर दवा का उदाहरण रखा गया, जिसकी कीमत करीब ₹2,700 बताई गई, जबकि उसकी अधिकतम खुदरा कीमत (MRP) करीब ₹27,000 थी।
सुप्रीम कोर्ट ने दवा की कीमत में करीब दस गुना अंतर पर सवाल उठाते हुए पूछा कि आखिर ऐसी मूल्य व्यवस्था कैसे चल रही है। अदालत ने इस स्थिति पर बेहद कड़ी टिप्पणी करते हुए इसे “carnage” करार दिया।
निजी अस्पतालों की फार्मेसी व्यवस्था पर भी सवाल
सुनवाई के दौरान निजी और कॉरपोरेट अस्पतालों में मरीजों को अस्पताल की अपनी फार्मेसी से ही दवाएं खरीदने के लिए मजबूर किए जाने के मुद्दे पर भी चिंता जताई गई। अदालत ने दवाओं की कीमतों और मरीजों पर पड़ने वाले आर्थिक बोझ को लेकर केंद्र से जवाब मांगा।
अदालत ने दवा बिक्री में एक समान 16 प्रतिशत मार्जिन रखने के सुझाव पर भी केंद्र सरकार से विचार करने को कहा। यह फिलहाल अदालत की ओर से लागू किया गया कोई नया नियम नहीं, बल्कि सुनवाई के दौरान सामने आया सुझाव है।
कैंसर जैसी गंभीर बीमारी के इलाज में दवाओं की ऊंची कीमतें लंबे समय से मरीजों और उनके परिवारों के लिए आर्थिक चुनौती बनी हुई हैं। सुप्रीम कोर्ट की इस टिप्पणी के बाद दवाओं की कीमत तय करने की व्यवस्था और निजी अस्पतालों की फार्मेसी नीति एक बार फिर चर्चा में आ गई है।
Times of Taj Disclaimer: यह समाचार उपलब्ध सार्वजनिक सूचनाओं और संबंधित रिपोर्टों के आधार पर तैयार किया गया है। मामले में अंतिम स्थिति संबंधित न्यायिक आदेश और आधिकारिक दस्तावेजों के अनुसार ही मानी जाएगी।
— अज़हर उमरी, वरिष्ठ पत्रकार
