30 प्रतिशत से अधिक आत्महत्याओं के पीछे पारिवारिक समस्याएं होने का दावा, डॉ. चिनू अग्रवाल ने मानसिक संघर्ष साझा करने पर दिया जोर
आगरा। मानसिक स्वास्थ्य की अनदेखी व्यक्ति के जीवन और पारिवारिक संबंधों पर गंभीर असर डाल सकती है। तनाव, अवसाद, बेचैनी और पारिवारिक विवादों से जूझ रहे अनेक लोग अपनी परेशानी साझा करने से बचते हैं। ऐसे में उनकी स्थिति और गंभीर हो सकती है। मानसिक स्वास्थ्य को कमजोरी या शर्म का विषय मानने के बजाय समय रहते विशेषज्ञों की मदद लेना जरूरी है।
विश्व मानसिक स्वास्थ्य दिवस 2026 के अवसर पर शनिवार को सिकंदरा-बोदला रोड स्थित विमल विहार में फीलिंग माइंड्स संस्था के कार्यालय पर आयोजित संगोष्ठी में मनोवैज्ञानिक एवं मनोचिकित्सक डॉ. चिनू अग्रवाल ने यह बात कही। कार्यक्रम में विशिष्ट अतिथि के रूप में डॉ. प्रतीक अग्रवाल मौजूद रहे।
फीलिंग माइंड्स की निदेशक एवं आईएसएमएचएए की अध्यक्ष डॉ. चिनू अग्रवाल ने कहा कि मानसिक परेशानियों के संकेतों में नींद और भूख में बदलाव, बेचैनी, चिड़चिड़ापन तथा लगातार उदासी शामिल हो सकते हैं। इसके बावजूद कई बार परिवार और आसपास के लोग व्यक्ति की परेशानी को समझ नहीं पाते। ऐसे में व्यक्ति अकेले संघर्ष करता रहता है और समस्या गंभीर हो सकती है।
डॉ. अग्रवाल ने दावा किया कि 30 प्रतिशत से अधिक आत्महत्याओं के पीछे पारिवारिक संबंधों से जुड़ी समस्याएं होती हैं। उन्होंने कहा कि रिश्तों में तनाव, आपसी मतभेद, संवाद की कमी और लंबे समय तक चलने वाले पारिवारिक विवाद मानसिक स्वास्थ्य को प्रभावित कर सकते हैं। ऐसी परिस्थितियों में खुलकर बातचीत करना और जरूरत पड़ने पर मनोवैज्ञानिक परामर्श लेना महत्वपूर्ण है।
उन्होंने बताया कि मानसिक स्वास्थ्य के प्रति लोगों में धीरे-धीरे जागरूकता बढ़ रही है। पति-पत्नी के बीच संवाद की कमी, बार-बार होने वाले विवाद और भावनात्मक दूरी जैसी समस्याओं के समाधान के लिए लोग दंपती परामर्श की मदद ले रहे हैं। समय रहते विशेषज्ञों से सलाह लेने पर रिश्तों में बेहतर संवाद स्थापित करने में सहायता मिल सकती है।
महिलाओं के मानसिक संघर्ष को समझना जरूरी
संगोष्ठी में महिलाओं की मानसिक स्थिति पर भी चर्चा हुई। डॉ. चिनू अग्रवाल ने कहा कि घर, बच्चों और परिवार की जिम्मेदारियां निभाते हुए कई महिलाएं अपनी भावनाओं, इच्छाओं और परेशानियों को पीछे रख देती हैं। उनके भीतर चल रहे मानसिक संघर्ष को समझना और उन्हें अपनी बात रखने का अवसर देना आवश्यक है।
मानसिक बीमारी को लेकर भ्रम दूर करने की अपील
डॉ. अग्रवाल ने कहा कि समाज में मानसिक स्वास्थ्य को लेकर आज भी कई भ्रम मौजूद हैं। मनोवैज्ञानिक परामर्श और मनोचिकित्सा के बीच अंतर को लेकर जानकारी की कमी के कारण लोग समय पर उचित सहायता नहीं ले पाते। उन्होंने मानसिक स्वास्थ्य से जुड़ी समस्याओं पर खुलकर चर्चा करने और जरूरत के अनुसार विशेषज्ञों से परामर्श लेने की अपील की।
कार्यक्रम का केंद्रीय विषय मानसिक स्वास्थ्य संबंधी चुनौतियों का प्रत्यक्ष अनुभव रखने वाले लोगों की आवाज को केंद्र में लाना रहा। संगोष्ठी का संदेश था कि मानसिक स्वास्थ्य से जुड़ी पहल केवल प्रभावित लोगों के लिए नहीं, बल्कि उन्हें साथ लेकर और उनके अनुभवों को समझकर की जानी चाहिए।
— TIMES OF TAJ
