आगरा। आगरा इंटरवेंशनल कार्डियोलॉजी सोसाइटी के तत्वावधान में होटल जेपी पैलेस में दो दिवसीय राष्ट्रीय सेमिनार ‘कार्डियोलॉजी आगरा लाइव 6.0’ का भव्य आयोजन किया गया। पहले दिन हार्ट फेलियर, कोरोनरी आर्टरी डिजीज, एओर्टा, कार्डियक सर्जरी और स्ट्रक्चरल हार्ट इंटरवेंशन (TAVR) जैसे विषयों पर 20 तकनीकी सत्रों में देश के 450 डेलीगेट्स ने सहभागिता की।
आयोजन सचिव डॉ. सुवीर गुप्ता ने कहा कि अपने हृदय को स्वस्थ रखना है तो अपनी लाइफ स्टाइल को सुधारें। तंबाकू बीड़ी सिगरेट शराब छोड़ दें। टहलना शुरू करें। अगर आपके परिवार में किसी को हृदय रोग है तो अतिरिक्त सतर्कता बरतें। उन्होंने बताया कि अगर किसी व्यक्ति को डायबिटीज है और वह स्मोकिंग करता है तो उसमें हार्ट फेल्योर का खतरा 10 गुना बढ़ जाता है।
डॉ. हिमांशु यादव ने ‘हार्ट फेलियर- किडनी इज द की’ विषय पर कहा कि हृदय को स्वस्थ रखना है तो किडनी को स्वस्थ रखिए। हार्ट और किडनी में से कोई भी एक अंग अस्वस्थ होने पर दूसरा भी बीमार हो जाता है।
सर्जरी से मना किए गए मरीजों के लिए वरदान बनी आधुनिक एंजियोप्लास्टी: डॉ. सुभाष चंद्रा
नई दिल्ली से आए डॉ. सुभाष चंद्रा ने बताया कि इंटरवेंशनल कार्डियोलॉजी में क्रांतिकारी प्रगति हुई है। अब जटिल कोरोनरी एंजियोप्लास्टी उन बुजुर्ग और हाई-रिस्क मरीजों में भी नियमित रूप से की जा रही है, जिन्हें सर्जरी के लिए अनुपयुक्त मानकर मना कर दिया जाता था। आधुनिक उपकरणों और विशेषज्ञता के चलते एंजियोप्लास्टी अब बाईपास के समकक्ष है। वहीं TAVR, MitraClip और ट्राइकसपिड वाल्व इंटरवेंशन जैसी तकनीकों ने बिना सर्जरी के खराब वाल्व बदलना संभव बना दिया है।
डुअल एंटीप्लेटलेट थेरेपी में संतुलन जरूरी: डॉ. सुमीत सेठी
नई दिल्ली के डॉ. सुमीत सेठी ने बताया कि एक्यूट कोरोनरी सिंड्रोम (ACS) के बाद डुअल एंटीप्लेटलेट थेरेपी (DAPT) में इस्केमिक सुरक्षा और ब्लीडिंग जोखिम के बीच संतुलन जरूरी है। कोरोनरी इंटरवेंशन के बाद क्लोपिडोग्रेल की तुलना में प्रासुग्रेल और टिकाग्रेलर अधिक प्रभावी हैं, लेकिन पूर्व में स्ट्रोक/TIA वाले मरीजों में प्रासुग्रेल नहीं देना चाहिए। अधिक ब्लीडिंग रिस्क वाले मरीजों के लिए क्लोपिडोग्रेल आज भी सुरक्षित विकल्प है।
सर्जरी के बिना इलाज की क्रांति, सुरक्षा सर्वोपरि: डॉ. सुब्रत अखौरी
फरीदाबाद के डॉ. सुब्रत अखौरी ने कहा कि आज मरीज ओपन सर्जरी से बचकर मिनिमली इनवेसिव इलाज चाहते हैं। ऐसी तकनीकें आ चुकी हैं जिनकी पहले कल्पना भी नहीं थी। उन्होंने कहा कि मरीज की सुरक्षा के लिए दो बातें जरूरी हैं – 1. कम से कम जटिलता और 2. व्यवस्थित प्रणाली। उन्होंने कहा कि सही केस चयन, सटीक काउंसलिंग और योजनाबद्ध इलाज से जटिलताओं को रोका जा सकता है।
हृदय-किडनी रोगियों में पोटैशियम नियंत्रण जरूरी: डॉ. जितेंद्र कुमार
हृदय और किडनी रोगियों में बढ़े पोटैशियम (हाइपरकलीमिया) का प्रबंधन इलाज जारी रखने के लिए जरूरी है। फरीदाबाद के डॉ. जितेंद्र कुमार ने अपने आलेख में बताया कि CKD और हार्ट फेल्योर की जीवनरक्षक दवाओं RAAS और MRA से 40-50% मरीजों में पोटैशियम बढ़ जाता है। उन्होंने बताया कि दवा SZC एक घंटे में पोटैशियम कम करना शुरू करती है। REALIZE-K ट्रायल में इससे सामान्य पोटैशियम के साथ स्पिरोनोलैक्टोन जारी रखना संभव रहा। हाइपरकलीमिया में दवा बंद करने के बजाय निगरानी और प्रबंधन बेहतर है।
TAVR वाल्व खराब होने पर अगला कदम क्या? – डॉ. विवेका कुमार
मैक्स साकेत, नई दिल्ली के डॉ. विवेका कुमार ने बताया कि TAVR ने एओर्टिक स्टेनोसिस के इलाज में क्रांति लाई है, लेकिन वाल्व का डीजेनेरेशन देर से होने वाली जटिलता है। यह स्टेनोसिस या रिगर्जिटेशन के रूप में आ सकता है, जिसे थ्रोम्बोसिस, एंडोकार्डाइटिस और पैरावाल्वुलर लीक से अलग पहचानना जरूरी है। इसके लिए इको और सीटी स्कैन का एकीकृत मूल्यांकन जरूरी है। इलाज में निगरानी, एंटीकोआगुलेशन, वाल्व-इन-वाल्व TAVR और चुनिंदा मामलों में सर्जिकल एक्सप्लांटेशन विकल्प हैं। हार्ट-टीम मूल्यांकन और लाइफ-लॉन्ग फॉलो-अप आवश्यक है।
नई हार्ट फेलियर गाइडलाइंस में शीघ्र पहचान पर जोर: डॉ. गजिन्दर गोयल
फरीदाबाद के डॉ. गजिन्दर गोयल ने बताया कि ESC 2026 हार्ट फेलियर गाइडलाइंस में रोकथाम, शीघ्र पहचान और तुरंत इलाज पर फोकस है। वर्गीकरण को सरल किया गया है, रिस्क वाले लोगों के इलाज, सिद्ध दवाओं के बेहतर उपयोग और मोटापे के साथ हार्ट फेलियर वाले चुनिंदा मरीजों में नई वेट-लॉस थेरेपी को मान्यता दी गई है।
हार्ट अटैक के बाद घातक जटिलता का बिना सर्जरी इलाज: डॉ. राजगोपाल जे.
मैसूर के डॉ. राजगोपाल जे. ने बताया कि प्राइमरी एंजियोप्लास्टी स्टैंडर्ड बन गई है, लेकिन हार्ट अटैक के बाद एक्यूट सीवियर माइट्रल रिगर्जिटेशन जैसी स्ट्रक्चरल जटिलताएं चुनौती हैं। पहले इसमें हाई-रिस्क इमरजेंसी ओपन सर्जरी ही विकल्प था। अब ‘मित्रा क्लिप’ जैसी मिनिमली इनवेसिव तकनीक से बिना चीरा-टांके के वाल्व की मरम्मत कर मरीजों को तेजी से ठीक किया जा रहा है।
HFpEF में इजेक्शन फ्रैक्शन सामान्य, पहचान जरूरी: डॉ. वरुण शर्मा
आगरा के डॉ. वरुण शर्मा ने बताया कि हार्ट फेल्योर के लगभग आधे मरीजों में पम्पिंग क्षमता सामान्य रहती है, जिसे HFpEF कहते हैं। थकान, सांस फूलना और सूजन के बावजूद इको में EF सामान्य आने से यह नजरअंदाज हो जाता है। रिस्क फैक्टर्स, क्लिनिकल स्कोर्स और बायोमार्कर से समय पर निदान जरूरी है। इसके प्रमुख कारण हाई बीपी, डायबिटीज, मोटापा और एट्रियल फाइब्रिलेशन हैं।
हार्ट फेलियर में ‘फोर पिलर्स’ और नई ‘वेरीसिगुएट’ थेरेपी कारगर : डॉ. सौरभ नागर
हार्ट फेलियर और कम इजेक्शन फ्रैक्शन (HFrEF) के मरीजों के लिए आधुनिक चिकित्सा वरदान साबित हो रही है। प्रसिद्ध हृदय रोग विशेषज्ञ डॉ. सौरभ नागर ने अपने व्याख्यान में हार्ट फेलियर के चार मुख्य स्तंभों (Four Pillars) और नई थेरेपी वेरीसिगुएट (Vericiguat) के लाभों पर प्रकाश डाला।
डॉ. नागर ने बताया कि HFrEF में सही समय पर सही उपचार जरूरी है। फोर पिलर्स थेरेपी मरीजों की जीवनशैली सुधारने और जोखिम कम करने में निर्णायक है। वहीं नई दवा वेरीसिगुएट हृदय की कार्यप्रणाली बेहतर बनाती है और बार-बार अस्पताल में भर्ती होने की आवश्यकता को काफी कम करती है।
उन्होंने कहा कि इन उन्नत दवाओं और नए अध्ययनों से गंभीर हार्ट फेलियर मरीजों को नया जीवन मिल रहा है।
जाने माने हृदय रोग विशेषज्ञ पद्मश्री डॉ. दलजीत सिंह गंभीर को लाइफटाइम अचीवमेंट अवार्ड से सम्मानित किया गया। साथ ही इकोकार्डियोग्राफी के बेसिक्स पर आधारित ईको बुक का लोकार्पण और डॉ. तरुण सिंघल के संयोजन में कार्डियोलॉजी पर ज्ञानवर्धक डिबेट भी हुई। सम्मेलन में पद्मश्री डॉ. डी.एस. गंभीर, डॉ. उमर हसन, डॉ. अनिल भान सहित कई विशेषज्ञों ने भी शोध साझा किए। डॉ. शरद पालीवाल, डॉ. कैलाश विश्वानी, डॉ. एसके कालरा, डॉ. ईशान गुप्ता ने भी विचार रखे।
डॉ. शरद पालीवाल, डॉ. एके गुप्ता, डॉ. रजनीश सिंह, डॉ. डीपी अग्रवाल, डॉ. सिद्धार्थ अग्रवाल, डॉ. अनिल सारस्वत, डॉक्टर केके विश्वानी, डॉ. विकास जैन, डॉ. विजय खुराना, डॉ. आनंद रावत, डॉ. दुर्गेश शर्मा, डॉ. ज्योति गर्ग, डॉ. वीएन कौशल, डॉ. तरुण मित्तल, डॉ. राजीव चुघ, डॉ. एसके कालरा, डॉ. सचिन गोयल, डॉ. अमित गुप्ता विभिन्न सत्रों में पैनलिस्ट और चेयरपर्सन रहे। देवेंद्र ढल ने संचालन किया और सुरेश सिंह ने व्यवस्थाएँ सँभाली। इससे पूर्व पद्मश्री डॉ. डीके हाजरा ने दीप जलाकर नेशनल कांफ्रेंस का शुभारंभ किया।
आयोजन सचिव डॉ. सुवीर गुप्ता ने बताया कि 25 अक्टूबर को होटल हॉलीडे इन, संजय प्लेस में सुबह 11 से दोपहर 2 बजे तक मेडिकल छात्रों के लिए विशेष इकोकार्डियोग्राफी वर्कशॉप होगी, जिसमें LVEF मापना, वाल्व खराबी की पहचान और रिपोर्ट पढ़ने की हैंड्स-ऑन ट्रेनिंग दी जाएगी।
