31 अक्टूबर को सरदार वल्लभभाई पटेल की 151वीं जयंती और पूर्व प्रधानमंत्री इंदिरा गांधी की 42वीं पुण्यतिथि; एक ही दिन दोनों नेताओं के ऐतिहासिक योगदान को याद करने की जरूरत पर चर्चा
नई दिल्ली। 31 अक्टूबर का दिन भारतीय इतिहास में दो महत्वपूर्ण राजनीतिक व्यक्तित्वों की याद से जुड़ा है। एक ओर देश के पहले उप प्रधानमंत्री एवं गृह मंत्री सरदार वल्लभभाई पटेल की जयंती मनाई जाती है, वहीं दूसरी ओर देश की पूर्व प्रधानमंत्री इंदिरा गांधी की पुण्यतिथि होती है।
ऐसे में एक नेता की जयंती पर आयोजित कार्यक्रम में दूसरे प्रमुख राष्ट्रीय नेता का उल्लेख तक नहीं किए जाने को लेकर सवाल उठ रहे हैं। सवाल यह है कि जब एक ही दिन देश के इतिहास से जुड़ी दो महत्वपूर्ण हस्तियों को याद किया जाता है, तो क्या दोनों के योगदान का सम्मानपूर्वक उल्लेख नहीं होना चाहिए?
सरदार वल्लभभाई पटेल को देश की एकता और रियासतों के एकीकरण में उनकी ऐतिहासिक भूमिका के लिए याद किया जाता है। उन्हें स्वतंत्र भारत का पहला उप प्रधानमंत्री और गृह मंत्री होने का गौरव प्राप्त है। उनकी जयंती को राष्ट्रीय एकता दिवस के रूप में भी मनाया जाता है।
वहीं, इंदिरा गांधी भारत की पहली महिला प्रधानमंत्री थीं। 31 अक्टूबर 1984 को उनकी हत्या कर दी गई थी। इस वर्ष उनकी 42वीं पुण्यतिथि मनाई जा रही है।
क्या राष्ट्रीय नेताओं को याद करने में भी चयन का सवाल?
यह मुद्दा किसी एक नेता के सम्मान को कम करने या दूसरे के योगदान को अधिक बताने का नहीं, बल्कि देश के इतिहास और लोकतांत्रिक परंपराओं में योगदान देने वाले सभी नेताओं को उचित सम्मान देने का है।
सरदार पटेल और इंदिरा गांधी दोनों की राजनीतिक भूमिका, कार्यकाल और ऐतिहासिक परिस्थितियां अलग-अलग रही हैं। विचारों में मतभेद हो सकते हैं, लेकिन देश के इतिहास में उनके योगदान का उल्लेख तथ्यों और सम्मान के साथ होना चाहिए।
एक जयंती के कार्यक्रम में दूसरे महत्वपूर्ण राष्ट्रीय व्यक्तित्व का जिक्र न होना अपने आप में सवाल खड़ा करता है। क्या देश के महान नेताओं को याद करने का दायरा व्यापक नहीं होना चाहिए? यह सवाल विचार करने योग्य है।
