कोलकाता।मोदी सरकार द्वारा पेश किया गया ‘वीबी-जी रामजी’ विधेयक सोमवार को लोकसभा में विपक्ष के भारी हंगामे और विरोध के बीच पारित हो गया। इस विधेयक के तहत केंद्र सरकार ने वर्षों से लागू महात्मा गांधी राष्ट्रीय ग्रामीण रोजगार गारंटी योजना (एमएनआरईजीए) का नाम बदलने और उसमें कुछ प्रशासनिक संशोधन करने का प्रस्ताव रखा है। विधेयक के पारित होते ही राजनीतिक हलकों में तीखी प्रतिक्रिया देखने को मिली, वहीं विपक्षी दलों ने इसे राष्ट्रपिता महात्मा गांधी का अपमान बताया।
विपक्ष का आरोप है कि ग्रामीण गरीबों और श्रमिकों के लिए बनी एक सफल और जनहितकारी योजना से महात्मा गांधी का नाम हटाने की कोई व्यावहारिक या नैतिक आवश्यकता नहीं थी। उनका कहना है कि यह केवल नाम परिवर्तन नहीं, बल्कि देश की ऐतिहासिक, नैतिक और वैचारिक विरासत से दूरी बनाने का प्रयास है। इसी मुद्दे को लेकर विपक्षी सांसदों ने सदन में नारेबाजी की और विधेयक का कड़ा विरोध किया, हालांकि सरकार ने अपने संख्यात्मक बहुमत के बल पर इसे पारित करा लिया।
केंद्र सरकार के इस फैसले के बाद पश्चिम बंगाल की मुख्यमंत्री ममता बनर्जी ने एक अहम राजनीतिक और प्रतीकात्मक घोषणा करते हुए मोदी सरकार को सीधी चुनौती दी है। ममता बनर्जी ने कहा कि पश्चिम बंगाल सरकार राज्य की रोजगार गारंटी योजना ‘कर्मश्री’ का नाम महात्मा गांधी के नाम पर रखेगी।
कोलकाता में आयोजित एक व्यापार और उद्योग सम्मेलन को संबोधित करते हुए मुख्यमंत्री ने भाजपा का नाम लिए बिना केंद्र सरकार पर तीखा हमला बोला। उन्होंने कहा कि अगर कुछ राजनीतिक दल देश के राष्ट्रीय प्रतीकों और महान व्यक्तित्वों का सम्मान नहीं कर सकते, तो पश्चिम बंगाल सरकार इस जिम्मेदारी को निभाएगी। ममता बनर्जी ने एमएनआरईजीए से महात्मा गांधी का नाम हटाने के फैसले को “शर्मनाक” करार देते हुए कहा कि ऐसा प्रतीत होता है मानो अब राष्ट्रपिता को भी भुलाने की कोशिश की जा रही है।
मुख्यमंत्री ने बताया कि राज्य सरकार की ‘कर्मश्री’ योजना के तहत वर्तमान में योग्य लाभार्थियों को 75 दिनों का रोजगार दिया जा रहा है, वह भी ऐसे समय में जब केंद्र सरकार पर एमएनआरईजीए की धनराशि रोकने के आरोप लग रहे हैं। उन्होंने स्पष्ट किया कि केंद्र से वित्तीय सहायता न मिलने के बावजूद राज्य सरकार अपने संसाधनों से लोगों को रोजगार उपलब्ध कराती रहेगी।
ममता बनर्जी ने यह भी घोषणा की कि आने वाले समय में ‘कर्मश्री’ योजना के तहत कार्यदिवसों की संख्या बढ़ाकर 100 दिन करने का लक्ष्य रखा गया है। उन्होंने कहा,
“हमने अपने संसाधनों से हजारों परिवारों को रोजगार दिया है। केंद्र से अनुदान पूरी तरह बंद होने पर भी हम पीछे नहीं हटेंगे। हम भिखारी नहीं हैं।”
राजनीतिक विश्लेषकों का मानना है कि एमएनआरईजीए के नाम परिवर्तन पर केंद्र सरकार के फैसले और ममता बनर्जी की प्रतिक्रिया न केवल एक मजबूत राजनीतिक संदेश है, बल्कि इससे आने वाले दिनों में केंद्र और राज्य सरकारों के बीच टकराव और तेज हो सकता है। यह मुद्दा राष्ट्रीय राजनीति में रोजगार, संघीय ढांचे और गांधीवादी विरासत को लेकर नई बहस को जन्म दे सकता है।

