आगरा: मस्जिद नहर वाली, सिकंदरा के ख़तीब मुहम्मद इक़बाल ने जुमे के ख़ुत्बे में ग़ज़ा की मौजूदा स्थिति, युद्धविराम (सीज़ फायर) और बदलते वैश्विक हालात पर गहराई से चर्चा की। उन्होंने ग़ज़ा के शहीदों को भावभीनी श्रद्धांजलि अर्पित करते हुए कहा कि उनकी कुर्बानियां पूरी उम्मत के लिए सब्र, हिम्मत और जागरूकता का प्रतीक हैं।
ख़ुत्बे के दौरान मुहम्मद इक़बाल ने कहा कि करीब चालीस दिनों तक चली भयावह जंग के बाद सीज़ फायर का ऐलान एक अहम मोड़ है। उन्होंने इसे एक समझदारी भरा कदम बताया, लेकिन साथ ही यह भी कहा कि इस पूरी स्थिति ने दुनिया की बड़ी ताक़तों के असली रवैये को उजागर कर दिया है। उन्होंने इशारा किया कि खुद को वैश्विक शक्ति कहने वाला देश हालात के दबाव में पीछे हटने को मजबूर हुआ।
उन्होंने कहा कि इस जंग के दौरान न सिर्फ अंतरराष्ट्रीय स्तर पर तनाव बढ़ा, बल्कि संबंधित देशों के आम नागरिक भी अपने हुक्मरानों के खिलाफ सड़कों पर उतर आए, जो बदलते जनमत और वैश्विक सोच का संकेत है।
मुहम्मद इक़बाल ने क़ुरआन-ए-करीम की सूरह अल-बक़रह (आयत 249) का हवाला देते हुए कहा:
“कई बार एक छोटा समूह अल्लाह के हुक्म से बड़े समूह पर ग़ालिब आ जाता है, और अल्लाह सब्र करने वालों के साथ है।”
उन्होंने समझाया कि मौजूदा हालात इस आयत की जीवंत मिसाल हैं, जहां सीमित संसाधनों के बावजूद मज़लूमों ने सब्र और इस्तिक़ामत के साथ बड़ी ताक़तों का डटकर सामना किया।
उन्होंने ग़ज़ा की तबाही का ज़िक्र करते हुए कहा कि जिस तरह वहां इमारतें खंडहर में बदलीं, उसने पूरी दुनिया को झकझोर कर रख दिया। मौलाना ने यह भी कहा कि अब ऐसे ही दृश्य विरोधी पक्ष के शहरों में भी देखने को मिल रहे हैं, जिसे उन्होंने “मज़लूमों की आह का असर” करार दिया।
अंतरराष्ट्रीय अदालत के फैसलों का हवाला देते हुए उन्होंने कहा कि अब वैश्विक मंच पर सच्चाई सामने आ रही है और दुनिया धीरे-धीरे वास्तविकता को स्वीकार कर रही है।
मुहम्मद इक़बाल ने ईरान की ओर से दिखाई गई हिम्मत और दृढ़ता की सराहना करते हुए कहा कि लंबे समय से पाबंदियों का सामना करने के बावजूद जिस साहस के साथ उसने मुकाबला किया, वह मुस्लिम नेतृत्व के लिए एक प्रेरणा है।
अपने संबोधन के समापन में उन्होंने इस बात पर विशेष जोर दिया कि इस संकट के दौरान मुस्लिम समाज के विभिन्न वर्गों में एकता देखने को मिली, जो एक सकारात्मक संकेत है। उन्होंने कहा कि यदि यही एकजुटता कायम रही, तो उम्मत हर चुनौती का मजबूती से सामना कर सकती है।
अंत में मुहम्मद इक़बाल ने दुआ की कि अल्लाह तआला ग़ज़ा के शहीदों को जन्नतुल फ़िरदौस में उच्च स्थान अता फरमाए, ज़ख्मियों को शीघ्र स्वास्थ्य प्रदान करे और पूरी उम्मत को एकता, सब्र और भाईचारे की राह पर कायम रखे। साथ ही उन्होंने लोगों से अपील की कि वे मज़लूमों के लिए दुआ करें और आपसी एकता को मजबूत बनाएं।

