आएंगी वन्य जीवन पर गहन शोध करने वाली देश की प्रमुख हस्तियां
हरविजय सिंह बाहिया की रॉकस्टार ऑफ बेरा के बाद दूसरी कॉफी टेबल बुक का होगा विमोचन
आगरा। प्रकृति और वन्यजीवन की अद्भुत दुनिया को समर्पित एक ऐतिहासिक पल आगरा में 26 अक्टूबर को साकार होने जा रहा है। शहर के प्रसिद्ध उद्योगपति, समाजसेवी और प्रकृति फोटोग्राफर हरिविजय सिंह बाहिया द्वारा रॉकस्टार ऑफ बेरा के बाद दूसरी सृजित शानदार कॉफी टेबल बुक ‘लॉर्ड्स ऑफ गिर’ (LORDS OF GIR) का विमोचन समारोह होटल क्लार्क्स शिराज में आयोजित होगा। यह पुस्तक गिर के जंगलों और वहां के शाही शेरों के जीवन की कहानी को शानदार फोटोग्राफी और संवेदनशील दृष्टिकोण के साथ प्रस्तुत करती है।
इस अवसर पर देश के दो महान वन्यजीव संरक्षण विशेषज्ञ विशेष अतिथि के रूप में उपस्थित रहेंगे।
डॉ. दिव्यभानु सिंह चावड़ा, जो भारतीय वन्यजीव संरक्षण की दुनिया में एक प्रतिष्ठित नाम हैं। वे “द स्टोरी ऑफ एशियाज़ लॉयंस” (The Story of Asia’s Lions), “द लॉयंस ऑफ इंडिया” (The Lions of India) और “द स्टोरी ऑफ इंडिया’ज़ यूनिकॉर्न्स” (The Story of India’s Unicorns) जैसी प्रसिद्ध पुस्तकों के लेखक हैं।
उन्होंने डब्ल्यूडब्ल्यूएफ–इंडिया (WWF–India) के अध्यक्ष और बीएनएचएस (BNHS) के उपाध्यक्ष के रूप में कार्य करते हुए दशकों तक वन्यजीव संरक्षण में अमूल्य योगदान दिया है।
वहीं डॉ. एमके रंजीतसिंह झाला, जो भारतीय वन्यजीव (संरक्षण) अधिनियम, 1972 के प्रमुख निर्माता माने जाते हैं। वे सौराष्ट्र के वांकानेर राजघराने से हैं और भारत सरकार में कई महत्वपूर्ण पदों पर रहते हुए वन्यजीवों के हित में निर्णायक नीतियाँ बनाई हैं।
उनकी प्रसिद्ध पुस्तकों में “द इंडियन ब्लैकबक” (The Indian Blackbuck), “इंडियन वाइल्डलाइफ” (Indian Wildlife) और “बियॉन्ड द टाइगर : पोर्ट्रेट्स ऑफ एशियन वाइल्डलाइफ” (Beyond the Tiger: Portraits of Asian Wildlife) शामिल हैं, जिन्होंने भारतीय वन्यजीवन पर अमिट छाप छोड़ी है।
भारत में चीतों की पुनर्वापसी की नीति के पीछे भी डॉ. रंजीतसिंह झाला और डॉ. दिव्यभानु सिंह चावड़ा के गहन शोध और नीति सलाह का गहरा योगदान रहा है।
बता दें कि आगरा के प्रतिष्ठित उद्योगपति, समाजसेवी और प्रकृति प्रेमी हरिविजय सिंह बाहिया ने अपने कैमरे के माध्यम से वर्षों तक भारत के वन्यजीवन की आत्मा को कैद किया है। गुजरात के गिर के जंगलों में बिताए गए उनके असंख्य अनुभवों और शेरों के जीवन के प्रति उनकी आत्मीय संवेदना इस पुस्तक में झलकती है।
हरिविजय सिंह बाहिया को न केवल एक सफल उद्यमी के रूप में, बल्कि एक समर्पित वन्यजीव फोटोग्राफर और प्रकृति के रक्षक के रूप में भी जाना जाता है। इससे पूर्व तेंदुए की अद्भुत दुनिया पर आधारित उनकी रॉकस्टार ऑफ बेरा कॉफी टेबल बुक का विमोचन विगत वर्ष किया गया था।
उनका मानना है कि “जंगल केवल पेड़ और जानवरों का संसार नहीं, बल्कि हमारी संस्कृति, विरासत और अस्तित्व का आईना हैं।”
‘लॉर्ड्स ऑफ गिर’ उनके वर्षों के अनुभव, समर्पण और प्रकृति के प्रति प्रेम का एक जीवंत दस्तावेज़ है, जो आने वाली पीढ़ियों को वन्यजीवन के संरक्षण के लिए प्रेरित करेगा। इस आयोजन में प्रकृति, फोटोग्राफी और संरक्षण के क्षेत्र से जुड़ी अनेक प्रतिष्ठित हस्तियाँ, पर्यावरणप्रेमी, फोटोग्राफर, लेखक और विद्यार्थी शामिल होंगे।
‘लॉर्ड्स ऑफ गिर’ केवल एक पुस्तक नहीं, बल्कि यह भारत के वन्यजीवन के गौरव, गिर के शेरों की गरिमा और प्रकृति के प्रति संवेदनशीलता का एक जीवंत चित्रण है एक ऐसी कहानी जो बताती है कि जंगल केवल वन नहीं, बल्कि हमारे अस्तित्व की आत्मा हैं।

