आगरा। हिंदुस्तान इंस्टीट्यूट ऑफ मैनेजमेंट एंड कंप्यूटर स्टडीज़ (HIMCS) के विद्यार्थियों द्वारा अपने परिसर में दीपावली बाजार का आयोजन किया गया। इस वर्ष के बाजार में पूजा सामग्री, सजावटी दीपक, थालियाँ, झालर, पारंपरिक परिधान और रसोई के बेसिक किराना जैसे प्याज़, दाल, आटा, तेल, चीनी, चायपत्ती, नमक आदि मात्र 25 से 250 रुपये की किफायती दरों पर उपलब्ध कराए गए।
बाज़ार की संपूर्ण व्यवस्था विद्यार्थियों, शिक्षकों और संस्थान के स्टाफ सदस्यों ने मिलकर संभाली। विद्यार्थियों ने सांस्कृतिक प्रस्तुतियों से भी आगंतुकों का मन मोह लिया। प्रथम वर्ष की छात्राओं चेतना राजपूत, तनु पुंढीर और मानसी भदौरिया ने मंच संचालन किया, जबकि अंतिम वर्ष के विद्यार्थियों रिमझिम जैन, मानवी गुलाटी और सुमित यादव ने स्टॉल प्रबंधन की ज़िम्मेदारी निभाई।
इस अवसर पर प्रो. डॉ. नवीन गुप्ता, निदेशक, ने विद्यार्थियों को समाज के प्रति उत्तरदायित्व की प्रेरणा देते हुए कहा कि “त्योहारों की खुशियाँ सबके साथ बाँटने से ही पूरी होती हैं। यदि हम प्रतिदिन चार रुपये बचाकर किसी ज़रूरतमंद तक पहुँचा दें, तो यह हमारे भीतर स्थायी परिवर्तन लाएगा।” प्रो. डॉ. आर.एस. पवित्र ने भी दीपावली की शुभकामनाएँ देते हुए आयोजन और ग्रामीणों के साथ खुशियाँ बाँटने के प्रयास की प्रशंसा की।

बाज़ार में पुरुषों, महिलाओं और बच्चों के लिए कपड़े, मेहँदी, विभिन्न खेल, खिलौने, मनोरंजन के बूथ, चाय-नाश्ता और कढ़ी-चावल के स्टॉल लगाए गए। विद्यार्थियों ने ठंडे पेय और पानी पूरी गोलगप्पे के ठेला स्टॉल की भी व्यवस्था की। इस बार आगरा शहर की आर्थिक और गैर-आर्थिक इकाइयों ने भी प्रायोजन देकर सहयोग प्रदान किया।
कुल 25 अस्थायी स्टॉल स्थापित किए गए, जिनमें सभी ने जरूरतमंदों के लिए सहयोग दिया। विद्यार्थियों ने शिक्षकों और अन्य स्टाफ से आग्रह किया कि जो वस्तुएँ वे खरीद तो लेते हैं पर उपयोग नहीं कर पाते, उन्हें दान स्वरूप उपलब्ध कराएँ। साथ ही दीपावली से संबंधित वस्तुएँ सीधे जरूरतमंद तक पहुँचाने की व्यवस्था भी की गई।
बाज़ार में लगभग 250 ग्रामीण आगंतुक शामिल हुए, जिनमें पिंगरी गाँव, भीमनगर और फरह क्षेत्र के लोग प्रमुख रूप से उपस्थित थे। सभी आगंतुक उत्पादों, खाद्य पदार्थों और समग्र माहौल देखकर अत्यंत उत्साहित दिखे।
इस अवसर पर समस्त शिक्षकगण, कर्मचारी और विद्यार्थी उपस्थित रहे, जिन्होंने मिलकर इस दीपावली बाजार को सफल और यादगार बनाया।

