यह विवाद बलवंत एजुकेशनल सोसाइटी, आगरा के प्रबंधन को लेकर स्व. राजा बलवंत सिंह के परिवारजनों जितेन्द्र पाल सिंह और अनिरुद्ध पाल सिंह के बीच उत्पन्न हुआ था। दोनों ही आवागढ़ एस्टेट की वंश परंपरा से संबंध रखते हैं। सोसाइटी द्वारा संचालित राजा बलवंत सिंह कॉलेज आगरा का एक प्रतिष्ठित शैक्षणिक संस्थान है।
मुख्य निर्देश:
वर्तमान में सोसाइटी की कोई वैध प्रबंध समिति नहीं है।
दोनों भाइयों को कॉलेज परिसर में प्रवेश करने या प्रबंधन के दैनिक कार्यों में हस्तक्षेप करने से रोक दिया गया।
राज्य सरकार को निर्देश दिया गया कि सोसाइटी के उपविधियों के अनुसार रिक्त पदों की नियुक्ति करे।
न्यायालय ने संतुलित समाधान देते हुए निर्णय लिया कि 1 दिसंबर 2025 से पहले ढाई वर्ष तक जितेन्द्र पाल सिंह उपाध्यक्ष रहेंगे, इसके बाद अगले ढाई वर्ष के लिए अनिरुद्ध पाल सिंह यह जिम्मेदारी संभालेंगे।
दोनों भाइयों को अपनी सदाशयता दिखाने हेतु ₹2-2 लाख सोसाइटी के बैंक खाते में जमा कराने के निर्देश।
राज्य सरकार को यह भी निर्देश कि यदि सोसाइटी की संपत्ति का क्रय-विक्रय उपविधियों के विपरीत किया गया हो, तो उचित कार्यवाही की जाए।
अदालत की टिप्पणी:
न्यायमूर्ति शम्शेरी ने कहा,
“दोनों भाई अपने पूर्वजों की विरासत को आगे बढ़ाने के बजाय संपत्ति के अधिकार को लेकर विवाद में उलझे हुए हैं। वे समाज के लिए कोई कार्य किए बिना ‘राजा’ की उपाधि ढोना चाहते हैं, जो अब अस्तित्व में नहीं है।”
अदालत ने 2011 के एक निर्णय (डॉ. डी.पी.एस. भाटी बनाम उत्तर प्रदेश राज्य) का उल्लेख करते हुए कहा कि शिक्षा के इस मंदिर को पारिवारिक झगड़ों की भेंट नहीं चढ़ने देना चाहिए।
आगे की प्रक्रिया:
जिला एवं सत्र न्यायाधीश, आगरा (सोसाइटी के पदेन अध्यक्ष) और अन्य सरकारी सदस्य फिलहाल सोसाइटी के कार्यों का संचालन करेंगे।
नए बोर्ड का गठन 1 जनवरी 2026 तक किया जाएगा और आवश्यक धनराशि भी इसी समय तक जमा करनी होगी।

