शंकराचार्य अपमान व UGC नियमों के विरोध में इस्तीफा देने वाले सिटी मजिस्ट्रेट सस्पेंड
बरेली। शंकराचार्य के कथित अपमान और UGC के नए नियमों के विरोध में इस्तीफा देने वाले बरेली के सिटी मजिस्ट्रेट अलंकार अग्निहोत्री का मामला अब प्रशासनिक कार्रवाई से आगे बढ़कर धार्मिक और सामाजिक बहस का विषय बन गया है। इस पूरे घटनाक्रम पर ज्योतिषपीठ के शंकराचार्य स्वामी अविमुक्तेश्वरानंद सरस्वती ने बड़ा बयान देते हुए कहा है कि “ऐसे अफसर को धर्म में बड़ा और सम्मानित पद दिया जाएगा।”
अलंकार अग्निहोत्री ने अपने इस्तीफे में आरोप लगाया है कि उन्हें डीएम आवास पर बंधक बनाया गया, मानसिक दबाव डाला गया और उनकी जान को खतरा तक पैदा हुआ। उन्होंने यह कदम शंकराचार्य के अपमान और उच्च शिक्षा से जुड़े UGC के नए नियमों के विरोध में उठाने की बात कही है।
मामला तूल पकड़ने के बाद राज्य सरकार ने सिटी मजिस्ट्रेट अलंकार अग्निहोत्री को सस्पेंड कर दिया है। साथ ही पूरे प्रकरण की जांच के लिए मंडलायुक्त (कमिश्नर) को जांच अधिकारी नियुक्त किया गया है। प्रशासन का कहना है कि जांच रिपोर्ट आने के बाद आगे की कार्रवाई तय की जाएगी।
इधर, शंकराचार्य स्वामी अविमुक्तेश्वरानंद ने कहा कि “जो व्यक्ति पद, प्रतिष्ठा और सरकारी सुविधा छोड़कर धर्म और सत्य के पक्ष में खड़ा होता है, वह साधारण व्यक्ति नहीं होता। ऐसे लोगों को समाज और धर्म में उचित सम्मान मिलना चाहिए।” उनके इस बयान के बाद साधु-संत समाज में हलचल तेज हो गई है।
इस प्रकरण को लेकर विभिन्न सामाजिक संगठनों और धार्मिक समूहों ने प्रशासनिक कार्रवाई पर सवाल उठाते हुए निष्पक्ष जांच की मांग की है। वहीं, प्रशासनिक हलकों में इसे अनुशासन, अधिकार और आस्था के टकराव के रूप में देखा जा रहा है।
फिलहाल यह मामला प्रदेश की राजनीति, प्रशासन और धार्मिक विमर्श—तीनों के केंद्र में आ गया है, और आने वाले दिनों में इस पर और बड़े बयान व निर्णय सामने आने की संभावना है।

