आगरा,: खानकाह हाजी रमज़ान अली शाह चिश्ती साबरी (खानकाह साबरिया रमज़ानिया) में वार्षिक जश्न-ए-गौस-ए-आजम का आयोजन किया गया। इस अवसर पर हाजी रमज़ान अली शाह और हजरत मुख़्तार हुसैन संदीलवी की याद में विशेष फातिहा पढ़ी गई, जिसे बड़े भव्य तरीके से संपन्न किया गया।
खानकाह के प्रमुख पीरज़ादा हाजी क़ासिम अली शाह चिस्ती साबरी ने जश्न के बारे में अपने विचार साझा किए और हजरत रमज़ान अली शाह की बगदाद यात्रा तथा उनके जीवन की प्रेरक कहानियाँ सुनाईं। उन्होंने कहा,
“वलीअल्लाह ने अपनी पूरी जिंदगी प्रेम और सेवा के माध्यम से इस्लाम का संदेश फैलाया।”
असर की नमाज़ के बाद जिक्र-ए-इलाही किया गया और नमाज़-मग़रिब के बाद फातिहा लंगर वितरित किया गया। फातिहा के बाद एक मनक़बती और शायरी की महफ़िल आयोजित की गई, जिसकी अध्यक्षता सय्यद मीराजुद्दीन कादरी चिश्ती ने की। संचालन का काम मौलाना दिलकश जालोनवी ने संभाला।
इस अवसर पर विशेष अतिथि के रूप में सैय्यद इशाअत अली अबुल उलाई (नायब सज्जादानशीन), सूफी अंसारी मियाँ लियाक़ती, सैय्यद सलीम, समीय आगाई, सैय्यद जाकिर मियाँ मौजूद रहे। शायरों में मौलाना दिलकश जालोनवी, सैय्यद रिज़वान अहमद क़ारार, सैय्यद तनवीर निज़ामी, सईदुल्लाह माहिर, हाजी सैय्यद गुलजार अकबराबादी ने मनक़बती क़लाम प्रस्तुत किया।
मुख्य रूप से फातिहा में मौलाना इस्लाम कादरी, अब्दुल सईद आगाई, नाज़िम साबरी, इस्लाम वारसी, सूफी शकील, रफीक़ खान, मुराद अब्बास, हाशिम साबरी उपस्थित रहे।

