नई दिल्ली/लखनऊ। देश और प्रदेश में करीब डेढ़ दशक बाद होने जा रही जनगणना में इस बार कर्मचारियों को बड़ी राहत मिलने वाली है। केंद्र सरकार ने प्रगणक से लेकर स्टेट नोडल अफसर तक के मानदेय में रिकॉर्ड बढ़ोतरी कर दी है। नई व्यवस्था के तहत प्रगणक और सुपरवाइजर को दोनों चरणों को मिलाकर करीब ₹25 हजार मानदेय मिलेगा, जो 2011 की तुलना में लगभग छह गुना अधिक है।
केंद्र ने उत्तर प्रदेश समेत सभी राज्यों को जनगणना के लिए आवश्यक आदेश और बजट जारी करने के निर्देश दे दिए हैं। जनगणना पूरी तरह डिजिटल होगी, जिसमें डेटा कलेक्शन के लिए प्रगणक और सुपरवाइजर अपने निजी मोबाइल फोन का उपयोग करेंगे।
दो चरणों में मिलेगा मानदेय
- पहला चरण (हाउसिंग सर्वे): ₹9,000
- दूसरा चरण (जनगणना): ₹16,000
2011 में यही दरें क्रमशः ₹1,500 और ₹3,300 थीं।
वरिष्ठ अधिकारियों के लिए भी बढ़ा मानदेय
- स्टेट नोडल अफसर:
- हाउसिंग सर्वे: ₹30,000
- जनगणना चरण: ₹45,000
- कुल: ₹75,000
- राज्य स्तर पर अधिकतम 5 अधिकारी स्टेट नोडल अफसर के निर्देशन में कार्य करेंगे, जिन्हें दोनों चरणों के लिए ₹30,000 मानदेय मिलेगा।
- प्रमुख/सह प्रमुख जनगणना अधिकारी: ₹60,000
- जिला/शहर जनगणना अधिकारी: ₹45,000
- सब-डिविजन अफसर/चार्ज अफसर: ₹45,000
- चार्ज ऑफिस के जनगणना क्लर्क:
- पहला चरण: ₹12,000
- दूसरा चरण: ₹18,000
- कुल: ₹30,000
टीए/डीए नहीं मिलेगा
सरकार ने स्पष्ट किया है कि ब्लॉक विजिट के लिए अलग से टीए/डीए नहीं दिया जाएगा। हालांकि डिजिटल प्रक्रिया से काम को तेज और पारदर्शी बनाने पर जोर दिया गया है।
विशेषज्ञों के अनुसार, मानदेय में यह बढ़ोतरी कर्मचारियों का मनोबल बढ़ाने के साथ-साथ जनगणना कार्य को समयबद्ध और प्रभावी बनाने में मददगार साबित होगी।

