विनोद मिश्रा
बांदा। जिले के लघु सिंचाई विभाग में भ्रष्टाचार का ‘तालाब’ अब इतना गहरा हो चुका है कि प्रशासन की सख्त हिदायतें भी उसमें डूबती जा रही हैं! डीएम जे. रीभा ने खुद निरीक्षण कर अनियमितताएं पकड़ीं,लेकिन विभाग की “फाइलों में सच दब गया”, और “भ्रष्टाचार का पानी ऊपर चढ़’ गया !
बड़ोखर ब्लाक के मटौंध के भुजा तालाब और ग्राम चाहितारा में चेकडेम कम रपटे के निर्माण कार्यों में भारी
अनियमितताएं सामने आईं थीं । गुणवत्ता असंतोषजनक मिली।”
डीएम ने जांच के आदेश दिए। लेकिन सूत्र बताते हैं कि “जांच आगे बढ़ने से पहले ही फाइलें विभागीय दफ्तर में रोक दी गईं!
हमारी इन्वेस्टिगेशन टीम ने जब मौके पर जाकर जमीनी हालात देखे तो तस्वीर चौंकाने वाली थी।भुजा तालाब और चाहितारा चेकडेम गुणवत्ता विहीन मिला!
डीएम जे. रीभा ने भ्रष्टाचार पर जीरो टॉलरेंस की नीति अपनाने के निर्देश दिए थे,लेकिन विभाग के जिम्मेदार उन्हें सीधा ‘चैलेंज’ कर रहे हैं। यानी जांच “फाइल मरी नहीं, मार दी गई।”
अब सबकी निगाहें डीएम पर हैं। क्या वे लघु सिंचाई विभाग के इस ‘भ्रष्टाचार के तालाब’ को सूखाएंगी,या फिर विभागीय ठेकेदारों की ‘राजनीतिक छतरी’ के नीचे यह मामला भी ठंडा पड़ जाएगा ?

