लखनऊ। उत्तर प्रदेश विधानसभा चुनाव 2027 को लेकर राजनीतिक दलों ने अपनी तैयारियां तेज कर दी हैं। इसी कड़ी में आजाद समाज पार्टी (कांशीराम) ने भी चुनावी बिसात बिछानी शुरू कर दी है। पार्टी के राष्ट्रीय अध्यक्ष और नगीना सांसद चंद्रशेखर आजाद ने 45 विधानसभा क्षेत्रों के प्रभारियों की पहली सूची जारी कर राजनीतिक हलकों में हलचल बढ़ा दी है।
आजाद समाज पार्टी ने इस सूची के जरिए सोशल इंजीनियरिंग का संदेश देने की कोशिश की है। पार्टी ने अलग-अलग सामाजिक वर्गों को प्रतिनिधित्व देते हुए मुस्लिम समाज को भी बड़ी भागीदारी दी है। जारी सूची में 45 प्रभारियों में 11 मुस्लिम, 3 महिलाएं और 42 पुरुष शामिल हैं।
बसपा की तर्ज पर चुनावी प्रयोग?
राजनीतिक जानकारों का मानना है कि आजाद समाज पार्टी की यह रणनीति बहुजन समाज पार्टी के पुराने चुनावी मॉडल से मिलती-जुलती नजर आ रही है। माना जा रहा है कि विधानसभा प्रभारियों को क्षेत्र में संगठन मजबूत करने के साथ-साथ चुनावी तैयारी की जिम्मेदारी दी गई है और भविष्य में इनमें से कई चेहरे प्रत्याशी भी बनाए जा सकते हैं।
पश्चिम यूपी पर विशेष फोकस
आजाद समाज पार्टी का पश्चिमी उत्तर प्रदेश में अपेक्षाकृत बेहतर जनाधार माना जाता है। पार्टी ने मेरठ की तीन विधानसभा सीटों पर प्रभारी घोषित कर अपनी चुनावी सक्रियता का संकेत दिया है। इसके अलावा पूर्वांचल की कई सीटों को भी पहली सूची में जगह दी गई है।
सामाजिक समीकरण साधने की कोशिश
पार्टी ने अनुसूचित जाति और ओबीसी समुदाय को भी प्रमुखता देकर अपने परंपरागत सामाजिक आधार को मजबूत करने का प्रयास किया है। महिलाओं को प्रतिनिधित्व देकर पार्टी ने समावेशी राजनीति का संदेश देने की कोशिश की है।
अब सियासी नजरें इस बात पर टिकी हैं कि क्या आजाद समाज पार्टी के ये विधानसभा प्रभारी ही 2027 के चुनावी मैदान में पार्टी के अधिकृत उम्मीदवार बनेंगे या पार्टी आगे चलकर नई सूची जारी करेगी।
उत्तर प्रदेश की सियासत में आजाद समाज पार्टी की यह नई रणनीति आने वाले चुनावी समीकरणों को कितना प्रभावित करेगी, यह देखने वाली बात होगी।

