कोलकाता, 27 नवंबर | Times of TAJ Desk
पश्चिम बंगाल में वोटर लिस्ट के विशेष गहन पुनरीक्षण (SIR) के दौरान एक बड़ा खुलासा सामने आया है। निर्वाचन आयोग के एक वरिष्ठ अधिकारी ने बताया कि राज्य की मौजूदा मतदाता सूची में लगभग 26 लाख वोटरों के नाम 2002 के रिकॉर्ड से मेल नहीं खा रहे हैं।
ECI की ‘मैपिंग’ प्रक्रिया में बड़ा फर्क उजागर
सूत्रों के अनुसार, अब तक 6 करोड़ से अधिक गणना-प्रपत्र पोर्टल पर अपलोड किए जा चुके हैं। इन फॉर्म्स को ‘मैपिंग’ के जरिए पुरानी SIR सूचियों (2002–2006) से मिलाया जा रहा है।
एक अधिकारी ने बताया:“तुलना करने पर प्रारंभिक निष्कर्षों से पता चला है कि लगभग 26 लाख नामों का मिलान अब भी पुराने रिकॉर्ड से नहीं हो पा रहा है।”
यह विसंगति चुनाव आयोग के लिए एक बड़ी चुनौती बनकर उभरी है, क्योंकि यह डेटा भविष्य में वोटर लिस्ट की शुद्धता और विश्वसनीयता को प्रभावित कर सकता है।
ममता बनर्जी का हमला: “ECI अब BJP का कमीशन बन चुका है”
इस मुद्दे ने राजनीतिक तापमान और बढ़ा दिया है।
पश्चिम बंगाल की मुख्यमंत्री ममता बनर्जी ने 25 नवंबर को बोंगांव में आयोजित एक विशाल विरोध रैली में ECI पर गंभीर आरोप लगाए।
उन्होंने कहा कि:
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SIR प्रक्रिया “राजनीति से प्रेरित षड्यंत्र” है।
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इसका उद्देश्य “असली वोटरों को हटाकर BJP को फायदा पहुंचाना” है।
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चुनाव आयोग अब “BJP का कमीशन” बन चुका है।
बनर्जी ने यह भी आरोप लगाया कि:
“क्या वोटर लिस्ट BJP के ऑफिस से तैयार हो रही है?”
उनके नेतृत्व में TMC नेताओं और हजारों समर्थकों ने बोंगांव से ठाकुरनगर तक तीन किलोमीटर का विरोध मार्च निकाला। समर्थक SIR के विरुद्ध नारे लगा रहे थे और लोकतंत्र बचाने का संकल्प दोहरा रहे थे।
TMC का आरोप: बंगाल में SIR, पर असम में नहीं—क्या है केंद्र की चाल?
ममता बनर्जी ने कहा कि:
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SIR को चुनिंदा तरीके से केवल पश्चिम बंगाल में लागू किया गया।
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असम में, जहाँ विधानसभा चुनाव होने हैं, ऐसी कोई प्रक्रिया नहीं चलाई जा रही।
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इससे स्पष्ट है कि केंद्र सरकार और BJP 2026 के चुनावों से पहले वोटरों के नाम हटाने की साजिश कर रही है।
उन्होंने SIR को “अराजक, दबाव डालने वाला और खतरनाक” करार दिया।

